
जिंबॉब्वे में 200 हाथियों को मारकर मीट बॉटा जाएगा।
नमस्कार साथियों आज बात करते हैं हाल ही में एक न्यूज़ सुर्खी बनी थी कि जिंबॉब्वे में 200 हाथियों को मारकर मीट बाटेंगे। वजह बताई गई है कि 40 साल की सबसे बड़ी भुखमरी की वजह से यह फैसला लिया गया हैं। जिंबॉब्वे की जनसंख्या लगभग 7 करोड़ लोगों के खाने का संकट पैदा हो गया हैं।
तो आइए विस्तार से चर्चा करते हैं-
न्यूज़ एजेंसी रायटर्स के अनुसार जिंबॉब्वे सरकार ने भुखमरी से निपटने के लिए 200 हाथियों को मार कर उनके मीट को लोगों में बांटा जाएगा। जिंबॉब्वे पार्क एंड वाइल्डलाइफ अथॉरिटी ने इस बात की पुष्टि की हैं। बताया जा रहा हैं कि अलनीनो की वजह से सुखा पड़ने से देश की पूरी फसल बर्बाद हो गई है। ऐसे में जिंबॉब्वे के लोग खाने की कमी से जूझ रहे हैं।
जिंबॉब्वे में हाथियों के आंकड़े-
जिंबॉब्वे में हाथियों की संख्या लगभग 1 लाख हैं जो विश्व में हाथियों की संख्या की दृष्टिकोण में दूसरे स्थान पर हैं। जिंबॉब्वे के जंगलों और राष्ट्रीय पार्कों की केरिंग कैपेसिटी लगभग 55000 हाथियों को रखने की हैं। केरिंग कैपेसिटी(Carrying Capacity) किसी क्षेत्र विशेष में किसी प्रजाति कि वह अधिकतम संख्या होती हैं जो उस क्षेत्र विशेष के संसाधनों को सतत बनाए रखते हुए उसमे जीवन यापन एवं आवास कर सके। किसी प्रजाति संख्या केरिंग कैपेसिटी से अधिक होने पर पारिस्थितिक तंत्र का संतुलन बिगड़ जाता है और पारिस्थितिकी तंत्र में नकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकते हैं।
क्या भुखमरी मिटाने के लिए हाथियों को मारना नैतिक तौर पर उचित है?
वर्ष 2020 में देश के सबसे शिक्षित राज्य केरल के मल्लपुरम में एक गर्भवती हथिनी को अनानास में विस्फोटक देकर मारने की घटना ने देश और इंसानियत को शर्मसार कर दिया था। इस भीतर तक झकजोर देने वाली घटना का जिक्र इसलिए कर रहा हूं कि पशुओं के प्रति हमारा दृष्टिकोण सहानुभूति पूर्ण हो सके।
वैसे तो मनुष्य भोजन, वस्त्र, मनोरंजन और दैनिक जीवन की विभिन्न आवश्यकताओं के लिए आदिकाल से जीवों को मारकर अपना स्वार्थ पूरा करता आया है। लेकिन आधुनिक मानव विकास के समकालीन मनुष्य द्वारा भोजन और विलासिता के लिए जीवों की हत्या करना सर्वथा अनुचित और अनैतिक हैं।
लेकिन क्योंकि जिंबॉब्वे में वहां की जमीन की क्षमता से लगभग दो गुना से अधिक हाथी पाए जाते हैं जो कि वहां पर मानव और हाथी के बीच संघर्ष को जन्म देता हैं। अब मन में यह प्रश्न भी आ सकता है कि क्षेत्र की क्षमता से अधिक हाथियों को कहीं अन्यत्र प्रतिस्थापित किया जाए। इस प्रश्न का उत्तर यह है कि दुनिया में लगभग चार लाख 80 हजार हाथी पाए जाते हैं जिनमें से लगभग चार लाख से अधिक हाथी अफ्रीकी देशों विशेषतः जिंबॉब्वे के पड़ोसी देशों में पाए जाते हैं। अतः लगभग पूरे अफ्रीका में हाथियों की संख्या पर्याप्त हैं एवं जिंबॉब्वे के पड़ोसी देशों में हाथियों को प्रतिस्थापित करना तर्कसंगत नहीं हैं। हाथियों को दूसरे महाद्वीपों में प्रतिस्थापित करना भी एक चुनौतीपूर्ण कार्य हैं। अब यह तो स्पष्ट हो चुका हैं कि जिंबॉब्वे से हाथियों को कहीं और प्रतिस्थापित करके संख्या में कमी लाना व्यावहारिक नहीं हैं। अब हम बात करते हैं दूसरा और प्रभावी तरीका जिसमे कि हाथियों की नसबंदी करके प्रजनन दर को सीमित करके हाथियों की संख्या को नियंत्रित किया जा सकता हैं। यह तरीका नैतिक और पर्यावरण के अनुकूल भी है। रही बात भुखमरी की तो कृषि एवं खाद्य संगठन एफएओ तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी संयुक्त राष्ट्रसंघ की वैश्विक एजेंसीयां को संज्ञान लेकर भुखमरी मिटाने के प्रभावी उपाय करने चाहिए साथ ही विश्व के तमाम विकसित देशों को पिछडे़ देशों मे भुखमरी के समय खाद्यान्न आपूर्ति कर सहायता करनी चाहिए।
विश्व में और भारत में हाथियों की संख्या इस प्रकार है-


भारत में हाथियों के संरक्षण संवर्धन और कल्याण हेतु नीतिगत प्रयास
भारतीय संविधान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 A(g) के तहत, भारत के नागरिकों का यह कर्तव्य हैं कि वे वनों, नदियों, झीलों, और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा और सुधार करें। इसके साथ ही, उन्हें जीवित प्राणियों के प्रति दया रखनी चाहिए।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 48A में यह कहा गया है कि राज्य को पर्यावरण की रक्षा और सुधार करने और देश के वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा करने का प्रयास करना चाहिए।
वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972
इस अधिनियम के अंतर्गत हाथी को अनुसूची फर्स्ट में रखा गया हैं जिसके शिकार व्यापार और क्षति पहुंचाने पर 7 साल का सजा का प्रावधान हैं।
हाथियों का संरक्षण अधिनियम, 1879 का अधिनियम 6
अधिनियम के अनुसार, आत्मरक्षा के मामलों को छोड़कर या अधिनियम के तहत दिए गए लाइसेंस के अतिरिक्त जंगली हाथियों को मारना, घायल करना या पकड़ना अपराध हैं।
पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत, पशुओं के साथ क्रूरता करने पर जुर्माना और जेल हो सकती हैं।
पेटा इंडिया एक स्वयंसेवी संस्था हैं जो पशुओं और मवेशियों के साथ अमानवीयता और क्रूरता के विरुद्ध काम करती हैं तथा पशुओं के प्रति सहानुभूति पूर्ण व्यवहार को प्रेरित करने हेतु प्रतिवर्ष चयनित व्यक्तियों और संस्थाओं को पेटा पुरस्कार प्रदान करती हैं।
हाथी भारत का एक धरोहर पशु है।
भारत में केंद्रीय वन पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा अब तक कुल 14 प्रमुख हाथी राज्यों में 33 हाथी रिजर्व तथा 15 राज्यों में 150 हाथी गलियारे एलिफेंट कॉरिडोर स्थापित किए जा चुके हैं। ये हाथी रिजर्व, टाइगर रिजर्व, वन्यजीव अभयारण्यों और आरक्षित वनों के साथ ओवरलैप करते हैं।
क्या होता है एलिफेंट कॉरिडोर?
एलिफेंट कॉरिडोर जमीन का वह बड़ा भाग है, जिसका इस्तेमाल हाथी अपने दो या अधिक आवास स्थानों के बीच आने-जाने के लिए करते हैं। यह प्रायः ऐसे स्थल होते हैं, जहां से हाथियों का और मानव, दोनों का आवागमन ज्यादा होता है और नतीजे में संघर्ष देखा जाता है। ऐसे स्थानों को सरकार कॉरीडोर के रूप में चिह्नित कर सुरक्षित कर देती है।
प्रोजेक्ट एलिफेंट,1992
भारत सरकार ने वर्ष 1992 में प्रतिष्ठित “प्रोजेक्ट एलिफेंट“ लॉन्च किया।
इस परियोजना के तहत, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय देश में प्रमुख हाथी जनसँख्या वाले राज्यों 16 राज्यों (आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मेघालय, नागालैंड, उड़ीसा, तमिलनाडु, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल) को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करता है।
हाथी मेरे साथी कार्यक्रम
वर्ष 2011 में केंद्रीय वन और पर्यावरण मंत्रालय ने भारत में हाथियों के संवर्धन सुरक्षा और कल्याण हेतु वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया संस्था के साथ हाथी मेरे साथी कार्यक्रम की शुरुआत की।
हाथी मेरे साथी एक अभियान है जिसका उद्देष्य है-
मानव-हाथी संबंधों को मित्रतापूर्ण बनाना।
हाथियों के आवास और गलियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
मानव-पशु संघर्ष की समस्या से निपटना।
हाथियों के संरक्षण हेतु अंतरराष्ट्रीय प्रयास
अंतरराष्ट्रीय हाथी दिवस प्रत्येक वर्ष 12 अगस्त को मनाया जाता हैं।
हाथियों की अवैध हत्या की निगरानी (माइक) कार्यक्रम
यह एक साइट्स द्वारा संचालित और तकनीकी सहायता प्रदत्त कार्यक्रम है जो हाथियों की अवैध हत्या शिकार और व्यापार की प्रवृत्तियों की पहचान करना और प्रभावी नियंत्रण करना यह कार्यक्रम हाथी बहुतायत राज्यों में संचालित किया जा रहा हैं।
WWF, TRAFFICऔर अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव व्यापार निगरानी नेटवर्क मिलकर वन्यजीवों के संरक्षण हेतु काम करते हैं। TRAFFIC हाथीदांत जब्ती का वैश्विक रिकॉर्ड रखता है।
हाथीदांत और हाथीदांत बाज़ारों पर नियंत्रण
सीआईटीईएस राष्ट्रीय हाथीदांत कार्य योजना (एनआईएपी) के ज़रिए हाथीदांत और हाथीदांत बाज़ारों पर नियंत्रण रखा जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय हाथी फाउंडेशन नामक एनजीओ हाथियों के कल्याण के लिए काम करता हैं।
मानव हाथी संघर्ष प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
अंतर्राष्ट्रीय हाथी दिवस 12 अगस्त 2024 को केरल वन विभाग की मेजबानी में किया गया जिसका उद्देश्य हाथियों के संरक्षण पर विशेषज्ञों को एक मंच पर लाना और मानव का हाथियों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण को समाप्त करने के प्रयास करना।
मानव और हाथी के बीच संघर्ष के प्रमुख कारण-
तीव्र जनसंख्या वृद्धि।
औद्योगिक और अवसंरचनात्मक विकास।
कृषि क्षेत्र में विस्तार।
हाथी संबंधित क्षेत्रों से गुजरने वाले रेलवे सड़क आदि से दुर्घटनाएं।
हाथियों का अवैध व्यापार एवं शिकार। हाथी दांत का व्यापार विशेष रूप से हाथियों के संरक्षण में सबसे बड़ा नकारात्मक पहलू हैं।
हाथियों की संख्या में क्षेत्र की क्षमता से अधिक वृद्धि।
वन्य जीव और पर्यावरण के प्रतिजागरूकता का अभाव।
जलवायु परिवर्तन।
सारांश-
मनुष्य पाषाण काल से ही व्यक्तिगत इच्छाओं की पूर्ति हेतु वन्य जीवों के साथ अमानवीय व्यवहार करता आया हैं । इस पृथ्वी पर सभी जीवों को भोजन आवास और जीवन जीने का समान अधिकार हैं लेकिन मानव अपने स्वार्थ के खातिर स्वयं का हित और वन्य जीवों एवं मवेशियों का अहित करता आया हैं। लेकिन वर्तमान के मानव विकास के स्तर पर पृथ्वी के समस्त जीवों के साथ न्यायपूर्ण व्यवहार करना हम सब इंसानों का परम कर्तव्य हैं। अतः केवल सरकार और सरकार के नियमों के भरोसे न रहकर व्यक्तिगत रूप से रुचि लेकर प्रकृति के अमूल्य उपहार वन्य जीवों के संरक्षण संवर्धन और कल्याण हेतु सदैव तत्पर रहना चाहिए।
और आपके जो भी विचार हो, कमेन्ट बॉक्स मे साझा कीजिए।
Leave a comment