पारिस्थितिकी अनुकूल यात्रा

जब हम कहीं घूमने जाते हैं या किसी काम से अन्यत्र स्थान की यात्रा करते हैं और वहां ठहरते हैं। इस दौरान हम हमारी दैनिक गतिविधियों, यात्रा और ठहराव से किसी न किसी रूप में वहाँ के पर्यावरण, स्थानीय समुदायों, संस्कृतियों और परंपराओं को प्रभावित कर रहे होते हैं। ऐसी यात्रा जिससे पर्यावरण को कोई क्षति नहीं हो, लेकिन व्यावहारिक रूप में ऐसा संभव नहीं होता। इसलिए ऐसी यात्रा जिससे पर्यावरण पर न्यूनतम हानिकारक प्रभाव पड़ता हो, इको फ्रेंडली ट्रैवल या पारिस्थितिकी अनुकूल यात्रा कहलाती है। इस पोस्ट में हम इको फ्रेंडली ट्रैवल की आवश्यकता, प्रकिया, चुनौतियां और समाधान पर विस्तृत चर्चा करेंगे।
यात्रा के दौरान हम पर्यावरण को कैसे प्रभावित करते हैं?
जब हम यात्रा करते हैं तो यातायात से प्रदूषण फैलता हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक पानी की बोतल उपयोग में लेकर फेंक देते हैं। चाय और अन्य पेय पदार्थ की डिस्पोजल कप, टिशू पेपर, खाद्य सामग्री के पैकेट आदि से कचरा फैलता है। शैंपू, साबुन, तेल आदि के सिंगल यूज प्लास्टिक पैकिंग से कचरा फैला है। साथ ही अवशेष साबुन शैंपू तेल आदि से जल प्रदूषण और मृदा प्रदूषण भी होता है। ठहरने के दौरान कमरे में एसी अथवा हीटर का प्रयोग भी किसी ने किसी रूप से पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
पर्यावरण अनुकूल यात्रा क्यों आवश्यक है?
निम्न बिंदुओं की सहायता से हम उदाहरण सहित समझते हैं कि पर्यावरण अनुकूल यात्रा क्यों आवश्यक है?
1. पर्यावरण संरक्षण
यात्रा के दौरान परिवहन और अन्य गतिविधियों से ग्रीन हाउस गैसों और अन्य अपशिष्टों का उत्सर्जन होता है । पर्यावरण प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि की दर 0.20 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक हो चुकी है। औद्योगिक युग की शुरुआत से पूर्व में यह 0.06 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक थी और यह लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2050 तक पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ने का अनुमान है। इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई रणनीतिक प्रयास किया जा रहे हैं।
यात्रा के दौरान अपशिष्ट उत्सर्जन प्रदूषण फैलाकर पर्यावरण और वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। अतः पर्यावरण अनुकूल यात्रा पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण में एक योगदान हो सकता है।
2. आर्थिक लाभ
पारिस्थितिकी अनुकूल यात्रा आर्थिक रूप से भी लाभप्रद होती है जैसे हमारे घर से स्टेशन तक, घर से ऑफिस तक या अन्य छोटी दूरियों को पैदल चलकर या साइकिल से तय करने से यात्रा में होने वाला खर्च बचता है। यात्रा में ठहराव के लिए एसी वाला कमरा बिना एसी वाले कमरे से कहीं ज्यादा महंगा होता है। बिना एसी वाला कमरा लेकर हम पर्यावरण संरक्षण में योगदान भी दे सकते हैं और अपना खर्च भी कम कर सकते हैं।
3. स्वास्थ्य लाभ
छोटी दूरियों को पैदल या साइकिल से तय करने से हम पैदल चलने या साइकिल चलाने के विभिन्न स्वास्थ्य लाभों को अर्जित कर सकते हैं। पैदल चलने से हृदय संबंधी बीमारियों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हड्डियों की कमजोरी, मोटापा, तनाव आदि से राहत मिलती है। पर्यावरण अनुकूल पौधों से प्राप्त साधारण भोजन आधुनिक प्रोसेस्ड फूड से सस्ता होता है और स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियां चढ़ना स्वास्थ्य के लिए अच्छा अभ्यास होता है।
4. प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
इस पृथ्वी पर हमारे उपयोग के लिए संसाधन सीमित है। इन्हीं को हमारी आने वाली पीढियां के लिए भी बचा कर रखना आवश्यक है। अतः संसाधनों का तर्कसंगत उपयोग करना हमारे व्यक्तिगत और सामुदायिक जिम्मेदारी है।
पर्यावरण अनुकूल यात्रा के लिए क्या करें?
1. टिकाऊ परिवहन
- यात्रा के लिए कम प्रदूषण वाले या प्रदूषण मानकों का पालन करने वाले यातायात साधनों का प्रयोग करें। इलेक्ट्रिक व्हीकल इसके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प है।
- सामुदायिक परिवहन के साधनों का उपयोग करें।
- दैनिक जीवन की छोटी दूरियों के लिए साइकिल या इलेक्ट्रिक स्कूटी का प्रयोग करें।
- कार आदि वाहन की बैठक क्षमता पूर्ण होने पर ही उपयोग करें।
- अपनी कार या बाइक को यांत्रिक रूप से फिट रखें जिससे वे उत्सर्जन मानकों का पालन करें।
- लंबी दूरियों के लिए ट्रेन से यात्रा करना पर्यावरण अनुकूल होता है।
2. न्यूनतम अपशिष्ट उत्सर्जन नीति अपनाएं।
- यात्रा के दौरान सिंगल यूज़ प्लास्टिक कैरी बैग, प्लास्टिक पानी की बोतल आदि का प्रयोग कम से कम करें।
- रीसायकल RRR योग्य सामग्री अपनाएं।
- स्वच्छता का ध्यान रखें।
3. पर्यावरण अनुकूल भोजन करें।
- शाकाहारी और पौधों पर आधारित भोजन अपनाएं। पैकेज्ड फ़ूड कम से कम उपयोग मे लें। शाकाहारी भोजन प्रोसैस्ड फूड की तुलना में सस्ता स्वास्थ्य वर्धक और पर्यावरण अनुकूल होता है।
- डिस्पोजेबल कप प्लेट आदि का प्रयोग नहीं करें इसके स्थान पर कुल्हड़,पत्तों से निर्मित पत्तल दोनों का प्रयोग कर सकते हैं।
- टिशू पेपर का प्रयोग कम से कम करें। हाथ धोने के बाद टिशू पेपर के स्थान पर रुमाल का प्रयोग किया जा सकता है।
4. पर्यावरण अनुकूल ठहराव
- होटल में रुकते समय एसी का उपयोग तर्कसंगत रूप से करें। एक डिग्री सेल्सियस तापमान के अंतर पर लगभग 6% ऊर्जा बचाई जा सकती हैं। घूमने के उद्देश्य से यात्रा का समय ऐसा तय करें कि एसी अथवा हीटर की आवश्यकता नहीं पड़े।
- सिंगल यूज साबुन, तेल, शैंपू आदि के उपयोग से बचें। इनकी पैकिंग और बचा हुआ साबुन, तेल, शैंपू आदी अपशिष्ट के रूप में पर्यावरण प्रदूषित करता है। उक्त सामग्री घर से बड़े पैकेट के रूप में ले जा सकते हैं। जो एक से अधिक स्थानों पर ठहरने पर भी बार-बार प्रयोग में लिए जा सकते हैं।
- टॉयलेट फ्लश का उपयोग आवश्यकता से अधिक नहीं करें।
5. पर्यावरण मानकीकृत वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करें।
- इको लेबल एक मानकीकरण प्रक्रिया है। यह स्टैंडर्ड भारतीय मानक ब्यूरो BIS द्वारा उन उत्पाद या वस्तुओं को दिया जाता है जो पर्यावरण के लिए अनुकूल है। अतः वस्तुएं खरीदते समय इको लेबल देख कर खरीदें।
- विभिन्न वाणिज्य कंपनियां और संगठन उनके वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में कार्बन और अपशिष्ट उत्सर्जन और उसके निस्तारण के आधार पर ISO 14000 मानक प्राप्त होती हैं। ISO 14000 श्रृंखला संगठनों को उनके पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार करने और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व के निर्वहन के लिए पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली EMS स्थापित करने हेतु एक व्यवस्थित ढांचा प्रदान करती है। अतः वस्तुओं और सेवाओं की खरीद से पहले ISO 14000 स्टैंडर्ड अवश्य देखें।
- स्थानीय समुदायों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प उत्पाद पर्यावरण के लिए अनुकूल और अधिक भरोसेमंद होते हैं।
6. नेचर हाइकिंग, ट्रैकिंग एंड कैम्पिंग
नेचर हाइकिंग ट्रैकिंग और कैंपिंग पर्यावरण अनुकूल आउटडोर गतिविधियां हैं। जिसमें जंगलों, पहाड़ों और सुदूर क्षेत्रों में पैदल चलना, घूमना और वहां अस्थाई कैंप बनाकर ठहरना आदि शामिल होता है। ये गतिविधियां मनोरंजन और रोमांच के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण को निकट से देखने और समझने में भी मदद करती है। इससे प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आकर्षण और सहानुभूति बढ़ती है। वर्तमान में ये गतिविधियां काफी लोकप्रिय हो चुकी है। अतः हम मनोरंजन और घूमने के लिए इस प्रकार की गतिविधियों का चयन कर सकते हैं।
7. वन्यजीवों का संरक्षण करें।
प्राकृतिक स्थलों की यात्रा के दौरान वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को नुकसान नहीं पहुंचाएं। वन्य जीव वाले क्षेत्रों में अपशिष्ट नहीं फैलाएं और अनावश्यक शोर उत्पन्न नहीं करें। वन्यजीवों को खाद्य पदार्थ नहीं खिलायें। वन्यजीवों को खाद्य सामग्री खिलाना भी उनकी प्राकृतिक जीवन शैली, दिनचर्या और खाद्य प्रणाली में परिवर्तन करता हैं। वन्य जीव संरक्षण के लिए यह नकारात्मक है और भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दंडनीय अपराध है।
8. पर्यावरण पर अपने प्रभाव के प्रति सचेत रहें।
यात्रा की प्लानिंग और क्रियान्वयन के दौरान यात्रा द्वारा पर्यावरण पर हानिकारक प्रभाव का आकलन कर इसके विकल्प ढूंढ कर प्रभाव कम करने का प्रयास करना चाहिए।
9. अपने कार्बन फुटप्रिंट को उदासीन करें।
कार्बन फुटप्रिंट किसी व्यक्ति अथवा कंपनी द्वारा किसी गतिविधि के दौरान कुल ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन का मापन है। यात्रा के दौरान सृजित कार्बन फुटप्रिंट के बराबर अन्य पर्यावरण हितकारी गतिविधियां जैसे पौधरोपण आदि संपादित करके या कार्बन फुटप्रिंट ऑफसेट में निवेश करके यात्रा के नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों को उदासीन किया जा सकता है।
इको फ्रेंडली ट्रैवल चुनौतियां और समाधान
1. अधिक समय लगना
वर्तमान की भाग दौड़ भरी जिंदगी में हर कोई अपनी यात्रा को न्यूनतम समय में पूरा करना चाहता है। पर्यावरण अनुकूल यात्रा में सामान्य यात्रा की तुलना में अधिक समय लगता हैं। जैसे छोटी दूरियों को पैदल तय करना, हवाई यात्रा के स्थान पर ट्रेन से यात्रा करना आदि में अधिक समय लगता हैं।
समाधान
छोटी दूरी के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटी का प्रयोग कर सकते हैं। लंबी दूरी की घूमने के प्रयोजन की यात्रियों के लिए छुट्टियों या फ्री समय में प्लान कर सकते हैं।
2. सामाजिक प्रतिरोध और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का अभाव
इको फ्रेंडली ट्रैवेल अभी तक लोकप्रिय अवधारणा नही है क्योंकि समाज मे इसका कोई प्रत्यक्ष लाभ नही हैं। समाज में पर्यावरण के प्रति अभी भी पर्याप्त शिक्षा और जागरूकता का अभाव हैं। इस कारण आमजन पर्यावरण के प्रति अपने व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं समझता है। अतः पर्यावरण के प्रति पर्याप्त जागरूकता के अभाव में परंपरागत यात्रा प्रणाली के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल यात्रा प्रणाली का चयन अव्यवहारिक और असहज महसूस होने के कारण समाज इको फ्रेंडली ट्रैवल को प्रमोट नहीं करता है।
समाधान
समाज में पर्यावरण शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाकर इको फ्रेंडली ट्रैवल के अप्रत्यक्ष किंतु टिकाऊ आर्थिक और स्वास्थ्य लाभों से आमजन को जागरूक किया जाना चाहिए। साथ ही आमजन में पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों की समझ विकसित करनी चाहिए।
3. पर्यावरण अनुकूल गंतव्य स्थलों की कमी
इको फ्रेंडली डेस्टिनेशन के अभाव में हम चाहते हुए भी गन्तव्य स्थल पर पर्यावरण अनुकूल व्यवहार नही कर सकते हैं।
समाधान
सरकार को इसके लिए पर्याप्त नीतियां बना कर इको फ्रेंडली डेस्टिनेशन को प्रमोट करने चाहिए। विभिन्न लोकप्रिय डेस्टिनेशन के लिए पर्यावरण से सम्बंधित मानक तैयार कर पर्यावरण रेटिंग की व्यवस्था होनी चाहिए। इकोफ्रेंडली रेस्टोरेंट, होटल और अन्य गतिविधियों पर टैक्स में छूट देकर इन्हें प्रमोट किया जा सकता हैं।
इको फ्रेंडली ट्रैवल के समान अर्थ वाली शब्दावली
न्यूनतम प्रभाव यात्रा या Low Impact Travel
लौ इंपैक्ट ट्रैवल का तात्पर्य ऐसी यात्रा से है जिससे हम पर्यावरण के साथ-साथ वहां के स्थानीय समुदायों परंपराओं और संस्कृतियों पर भी न्यूनतम प्रभाव डालें।
शून्य अपशिष्ट यात्रा या जीरो वेस्ट ट्रैवलिंग
शून्य अपशिष्ट यात्रा से तात्पर्य ऐसी यात्रा से हैं इसके दौरान हम किसी भी प्रकार के अपशिष्टों का उत्सर्जन नहीं करते हैं।
ग्रीन ट्रैवेल या हरित यात्रा
यह न्यूनतम प्रभाव यात्रा, पर्यावरण अनुकूल यात्रा और शून्य अपशिष्ट यात्रा का संयुक्त रूप है।
निष्कर्ष
हम हमारी दैनिक क्रियाओं और यात्राओं के दौरान पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं और प्रकृति प्रदत्त प्राकृतिक संसाधनों जो कि सीमित हैं, का अनैतिक विदोहन करते हैं। इनको आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बचा कर हमारी जिम्मेदारी हैं। जितना हम प्रकृति से लेते हैं उतना वापस देना भी हमारा नैतिक दायित्व बनता है। हम अपने दैनिक जीवन में छोटी-छोटी पर्यावरण अनुकूल पहल अपना कर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। इको फ्रेंडली ट्रैवल भी एक पर्यावरण अनुकूल पहल हैं। इसे अधिक से अधिक व्यवहार में लाकर हम पर्यावरण को हमारे द्वारा होने वाले हानिकारक प्रभावों को कम कर सकते हैं।
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