कार्बन क्रेडिट क्या है?
कार्बन क्रेडिट एक परमिट है जो क्रेडिट धारक को एक निश्चित मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड या इसके समतुल्य अन्य ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन के अनुमति देता है। एक कार्बन क्रेडिट 1 टन CO2 या इसके समतुल्य प्रभाव वाली अन्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती या वायुमंडल पहले से विद्यमान गैसों को हटाने के बराबर होता है।
यदि कोई संस्था कार्बन न्यूनीकरण पहल करके 1 टन CO2 या इसके समतुल्य ग्रीन हाउस प्रभाव वाली गैसों के उत्सर्जन को रोकती हैं या वायुमंडल में पहले से विद्यमान ग्रीनहाउस गैसे को अवशोषित करती है तो उस संस्था को एक कार्बन क्रेडिट मिलता है। इस कार्बन क्रेडिट की एक मौद्रिक कीमत होती है जो इसे बेचने पर धारक को मिलती है।
जब कोई संस्था या कम्पनी एक कार्बन क्रेडिट खरीदनी है तो उसे 1 टन CO2 या इसके समतुल्य प्रभाव वाली ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन की अनुमति मिलती है।

कार्बन क्रेडिट का इतिहास
संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारी पैनल आईपीसीसी ने 1997 में क्योटो प्रोटोकॉल के तहत संपूर्ण विश्व में कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कार्बन क्रेडिट का प्रस्ताव तैयार किया गया था इसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में कार्बन उत्सर्जन के प्रति वैश्विक स्तर पर जिम्मेदारियां निर्धारित करना तथा कार्बन न्यूनीकरण परियोजनाओं को वित्त पोषित करना था। कार्बन न्यूनीकरण परियोजनाएं ऐसी परियोजनाएं और पहल होती है जो ग्रीन हाउस गैसें के उत्सर्जन में कमी या पहले से विद्यमान ग्रीन हाउस गैसों का अवशोषण करती है।
कार्बन क्रेडिट की आवश्यकता
पृथ्वी पर मानव के उद्भव से ही मानव विकास निरंतर प्रगतिरत है। इसी क्रम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने मानव विकास को नए आयाम तक पहुंचाया है। लेकिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने प्रकृति के साथ छेड़छाड़ कर पर्यावरण को निरंतर प्रदूषित किया है। इसका परिणाम आज हम ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के रूप में देख रहे हैं।
विकास का क्रम अव्युत्क्रमणीय है। विकास को रोका नहीं जा सकता है। उदाहरण के लिए जैसे बाइक, कार आदि परिवहन साधनों का प्रयोग न तो रोका जा सकता है, न ही कम किया जा सकता है। जबकि हमें यह ज्ञात है कि परिवहन सर्वाधिक CO2 उत्सर्जन गतिविधियों में से एक हैं। वर्तमान और निकट भविष्य में ऐसी कोई तकनीक हमारे पास मौजूद नहीं है, जिससे हम वर्तमान परिवहन क्षमता को बनाए रखते हुए शून्य कार्बन उत्सर्जित करें।
परिवहन के जैसे असंख्य उदाहरण है जो हमारे लिए अति आवश्यक हैं और शून्य कार्बन उत्सर्जन पर इनका कोई विकल्प मौजूद नहीं है। लेकिन कुछ अन्य ऐसी गतिविधियां जो कार्बन का अवशोषण करती है या पर्यावरण से कार्बन हटाती है, को बढ़ावा देकर अति आवश्यक गतिविधियों हेतु उत्सर्जित कार्बन की भरपाई की जाकर शून्य कार्बन उत्सर्जन को बनाए रखा जा सकता है। इसके लिए कार्बन क्रेडिट व्यापार अवधारणा विकसित हुई। जो व्यक्ति अथवा संस्था कार्बन अवशोषण या हटाने का काम करती हो उसे कार्बन क्रेडिट मिलता है। जिसे वह उन व्यक्तियों या संस्थाओं को बेचकर आर्थिक लाभ अर्जित कर सकते हैं, जो कार्बन उत्सर्जित करते है। कार्बन उत्सर्जित करने वाली कंपनियों को अपने उत्सर्जन की भरपाई के लिए इसके बराबर कार्बन क्रेडिट खरीदना होता है।
कार्बन बाजार
यह एक व्यापारिक प्रणाली है जो सामान्य बाजारों की तरह काम करती है। जैसे शेयर बाजार में शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं । इसी प्रकार कार्बन बाजार में कार्बन क्रेडिट का क्रय विक्रय होता है। शेयर मार्केट एक्सचेंज की तरह कार्बन क्रेडिट के भी एक्सचेंज होते हैं। जहां पर कोई कार्बन क्रेडिट धारक अपना कार्बन क्रेडिट बेचकर उसका मौद्रिक मान प्राप्त कर सकता है। लेकिन यहां पर यह सवाल पैदा होता है कि कोई कंपनी आर्थिक नुकसान उठाकर कार्बन क्रेडिट क्यों खरीदेगी? इसका जवाब है कुछ ऐसे उद्योग, जो बहुत अधिक कार्बन का उत्सर्जन करते हैं उनके लिए एक तय सीमा से अधिक कार्बन उत्सर्जन पर इसकी भरपाई के लिए कार्बन क्रेडिट खरीदना अनिवार्य होता है।
कार्बन बाजार के दो आयाम
कार्बन बाजार के दो प्रमुख आयाम होते हैं अनुपालना बाजार और स्वैच्छिक कार्बन बाजार।
अनुपालना बाजार
इसमें मुख्य रूप से अधिक ऊर्जा खपत वाले औद्योगिक क्षेत्र होते हैं। जिनके लिए सरकार या नियंत्रक संस्थाओं द्वारा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की सीमाएं निर्धारित की जाती है इससे अधिक उत्सर्जन पर इन औद्योगिक इकाइयों को कार्बन क्रेडिट खरीद कर अपने उत्सर्जन की भरपाई करना अनिवार्य होता है।
भारत में कार्बन ट्रेडिंग अनुपालना बाजार में निम्नलिखित आठ क्षेत्र आते हैं जिन्हें अपने उत्सर्जन की भरपाई अनिवार्य रूप से करनी होती है-
- एल्युमिनियम
- सीमेंट
- कागज और लुग्दी
- क्लोर-क्षार
- लोहा एवं इस्पात
- वस्त्र उद्योग
- पेट्रोकेमिकल
- पेट्रोलियम रिफाइनरी।
ये उद्योग अपनी निर्धारित ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बाध्यकारी होते हैं। ऐसा नहीं करने पर इन पर भारतीय पर्यावरण अधिनियम 1986 के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जाती है।
स्वैच्छिक कार्बन बाजार
स्वैच्छिक कार्बन बाजार में व्यक्ति अथवा कंपनियां जिन पर कार्बन उत्सर्जन पर किसी विशिष्ट लक्ष्यों को पूरा करने की बाध्यता नहीं होती है। लेकिन वे कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व CSR के तहत स्वेच्छा से अपने उत्सर्जन को ऑफसेट करने के लिए कार्बन अवशोषित करने वाली गतिविधियां संचालित करते हैं या कार्बन क्रेडिट खरीदने हैं।
कार्बन क्रेडिट बाजार का नियंत्रण
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन क्रेडिट बाजार का नियंत्रण संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क कन्वेंशन (UNFCCC) द्वारा किया जाता है। इसके अनुच्छेद 6 के तहत देश अपने ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक दूसरे देश की मदद आपस में कार्बन क्रेडिट आदान-प्रदान करके कर सकते हैं।
भारत में कार्बन क्रेडिट का नियंत्रण कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (CCTS) 2023 के तहत होता है। जिसे ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के अंतर्गत गठित राष्ट्रीय संचालन समिति (NSC), जिसके अध्यक्ष भारत के विद्युत सचिव होते हैं, द्वारा मॉनिटर किया जाता है। इसके अतिरिक्त केंद्रीय विद्युत विनियामक आयोग (CERC) कार्बन बाजार में सभी गतिविधियों पर देख-रेख रखता है।
भारत में कार्बन क्रेडिट एक्सचेंज
भारत में प्रमुख ऊर्जा एक्सचेंज कंपनियां इंडियन एनर्जी एक्सचेंज(IEX) और पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड(PXIL) कार्बन ट्रेडिंग एक्सचेंज के रूप में काम करते हैं। जहां पर कार्बन क्रेडिट खरीदे और बेचे जा सकते हैं।
कार्बन क्रेडिट का मूल्य
कार्बन क्रेडिट का मूल्य विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है जैसे क्रेडिट उत्पन्न करने वाली परियोजनाओं का प्रकार प्रयुक्त पद्धति, प्रमाणीकरण और बाजार की मांग एवं आपूर्ति। उक्त कारकों के आधार पर एक कार्बन क्रेडिट का मूल्य 1 से लेकर 500 या उससे अधिक डॉलर भी हो सकता है। इसी प्रकार भारत में भारत में कार्बन क्रेडिट का मूल्य 200 से 1000 रुपए हो सकता है।
कार्बन क्रेडिट का प्रमाणीकरण
यदि आप एक व्यक्ति या संस्था है जिसने कार्बन क्रेडिट उत्पन्न किए हैं और इसे बेचकर मौद्रिक राशि प्राप्त करना चाहते हैं तो सर्वप्रथम आपके कार्बन क्रेडिट का प्रमाणित होना आवश्यक है।
कार्बन क्रेडिट का प्रमाणीकरण स्वतंत्र तृतीय पक्ष सत्यापनकर्ताओं द्वारा किया जाता है। जो यह सुनिश्चित करते हैं कि उत्पादक द्वारा उत्सर्जन में कमी या हटाने के दावे इसके लिए स्थापित मानकों के अनुसार सही है। उदाहरण के लिए अगर आपने कार्बन न्यूनीकरण परियोजनाएं वृक्षारोपण आदि संचालित की है तो परियोजना से पूर्व एवं बाद की स्थिति में अंतर जैसे ग्रीन कवर कैनेपी, मृदा कार्बन, निकट वायुमंडल में संघटक, बायोमास में संचित कार्बन आदि का सापेक्ष आंकलन कर गणनाओं द्वारा यह सुनिश्चित किया जाता है कि वास्तव कितनी मात्रा में CO2 और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन रोका गया अथवा अवशोषित की गई।
भारत में कार्बन क्रेडिट का प्रमाणीकरण कार्बन क्रेडिट योजना 2023 के तहत स्थापित मानको के आधार पर किया जाता है।
कार्बन क्रेडिट जारी करने वाले मानक
कार्बन क्रेडिट के प्रमाणीकरण के लिए कुछ मानकों की आवश्यकता होती है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्बन क्रेडिट के कई मानक मान्यता प्राप्त है यह अंतरराष्ट्रीय कार्बन न्यूनीकरण और ऑफसेट गठबंधन(ICROA) द्वारा अनुमोदित होते हैं इनमें से कुछ निम्नलिखित है-
- सत्यापित कार्बन मानक (VCS)
- गोल्ड स्टैंडर्ड
- अमेरिकी कार्बन रजिस्ट्री (ACR)
- क्लाइमेट एक्शन रिजर्व(CAR)
- प्लान वीवो
- वुडलैंड कार्बन मोड आदि।
ये मानक विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं के लिए कार्य प्रणाली विकसित करते हैं। जिनसे यह निर्धारित किया जाता है कि उत्सर्जन में कमी या निष्कासन की गणना कैसे करनी है।
ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल(GWP)
इस पोस्ट में हम बार-बार CO2 या इसके समतुल्य ग्रीनहाउस गैस की बात कर रहे हैं। यहां पर समतुल्य की गणना ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता को आधार मानकर की जाती हैं। क्योंकि प्रत्येक ग्रीनहाउस गैस की ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता भिन्न होती है। इसके लिए कार्बन डाइऑक्साइड CO2 की ग्रीन हाउस प्रभाव उत्पन्न करने की क्षमता को आधार माना जाता है और इसका मान 1 मान लिया जाता हैं।
कोई अन्य गैस CO2 की तुलना में कितना अधिक ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करती है उसे गैस का ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल कहलाता है।
यहां पर प्रमुख गैसों के ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल का मान दिया गया है-
| ग्रीनहाउस गैस | ग्लोबल वार्मिंग पोटेंशियल(GWP) |
| कार्बन डाइऑक्साइड CO2 | 1 |
| मीथेन CH4 | 23 |
| नाइट्रस ऑक्साइड N2O | 296 |
| परफ्लोरोमिथेन CF4 | 5700 |
| सल्फर हेक्साफ्लोराइड SF6 | 222000 |
कार्बन क्रेडिट और सतत विकास लक्ष्य
कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग निम्नलिखित 8 सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने मे सहायक है-
- SDG-3 अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण
- SDG-6 स्वच्छ जल एवं स्वच्छता
- SDG-7 सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा
- SDG-11 टिकाऊ शहर एवं समुदाय
- SDG-12 जिम्मेदारीपूर्ण उपभोग और उत्पादन
- SDG-13 जलवायु कार्यवाही
- SDG-14 पानी के नीचे जीवन
- SDG-15 जमीन पर जीवन।
कार्बन क्रेडिट कौन उत्पन्न कर सकता है?
कार्बन क्रेडिट कंपनियां, संस्थान, किसान या व्यक्तिगत तौर पर कार्बन न्यूनीकरण और ग्रीन हाउस गैसों के अवशोषण से उत्पन्न किया जा सकता है।
निम्नलिखित गतिविधियों के संचालन से कार्बन क्रेडिट उत्पन्न किए जाते हैं-
- जीवाश्म ईंधन के स्थान पर नवीनीकरण ऊर्जा संसाधनों का उपयोग
- वृक्षारोपण और पेड़ों की कटाई रोक कर
- ऊर्जा दक्षता में सुधार
- अपशिष्ट प्रबंधन की पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपना कर
- बागानी कृषि एवं कृषि वानिकी अपनाकर
- आधुनिक तकनीक द्वारा वायुमंडल से कार्बन कैप्चर कर इसे भूमिगत या समुद्र तल में संग्रहित करना आदि।
क्या कार्बन क्रेडिट में निवेश करके मुनाफा कमाया जा सकता है?
इस प्रश्न का जवाब है नहीं।
कार्बन क्रेडिट की शेयर मार्केट की तरह लाभ अर्जित करने के लिए ट्रेडिंग नहीं की जा सकती है। कार्बन क्रेडिट से लाभ इसे सिर्फ एक बार बेचकर कमाया जा सकता है। सिर्फ इस कार्बन क्रेडिट को बेचा जा सकता है जो आपने उत्पन्न किया है।
अतः कार्बन क्रेडिट में निवेश पर्यावरण के प्रति अपने जिम्मेदारी निर्वहन करना मात्र है। इसमें निवेश किया गया पैसा भविष्य में रिटर्न और रिफंड नहीं देता है।
पर्यावरण के प्रति अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभाने के लिए पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली अपनाएं। पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली पर विस्तृत आर्टिकल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
कार्बन क्रेडिट खरीदना सिर्फ अत्यधिक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन करने वाले उद्योगों के लिए उनके उत्सर्जन को उदासीन बनाए रखने हेतु आवश्यक है।
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