
कोहरा क्या होता है? यह क्यों पड़ता हैं?
सर्दियों में अक्सर न्यूज़ हेडलाइंस में कोहरा छाया रहता है। प्रायः देखने और पढ़ने को मिलता हैं कि कोहरे के कारण इतनी ट्रेने लेट चल रही है या इतनी फ्लाइट कैंसिल कर दी गई है। कोहरे के कारण सड़क दुर्घटना होना आम बात है। क्या आपने कभी सोचा है कि कोहरा क्या होता है? और यह क्यों पड़ता है? आज की इस ब्लॉग में हम कोहरे के पीछे की विज्ञान को विस्तार से समझेंगे।
कोहरा क्या होता है?
दिन में पृथ्वी सूर्य से विकिरण ऊर्जा प्राप्त कर गर्म होती है और रात के समय पृथ्वी विकिरण उत्सर्जित कर ठंडी होती है। धरातल के पास की हवा ठंडे धरातल से संपर्क में आने से इसमें उपस्थित जलवाष्प संघनित होकर पानी की छोटी बूंदो में बदल जाती है। संघनन को हम ठंडी पानी की बोतल पर जमने वाली पानी की बूंदो के उदाहरण से आसानी से समझ सकते हैं।
जब हवा में उपस्थित जलवाष्प संघनित होकर पानी की बूंदो के रूप में हवा में तैरती है तो कोहरा बनता है। कोहरा बनाने की प्रक्रिया बादल बनने के समकक्ष है। अतः कोहरा भी एक प्रकार का बादल है जो धरातल के पास बनता है।
कोहरे की वैज्ञानिक परिभाषा
विज्ञान की भाषा में जब हवा में सापेक्ष आर्द्रता शत प्रतिशत हो जाती है। अर्थात हवा में नमी धारण करने की क्षमता पूर्ण हो जाती है तो इसके अतिरिक्त जलवाष्प बूंदो का रूप ले लेता है। ये बूंदे हल्की होने के कारण हवा में तैरती है। इसे ही हम कोहरा कहते हैं। कोहरे को अंग्रेजी में फॉग (Fog) कहते हैं।
आद्रता और सापेक्ष आर्द्रता
हवा में उपस्थित जलवाष्प या नमी को आद्रता या निरपेक्ष आर्द्रता कहते हैं। इसे ग्राम प्रति घन मीटर में नापा जाता है।
सापेक्ष आर्द्रता किसी निश्चित तापमान पर हवा में उपस्थित नमी और उसे हवा की अधिकतम नमी धारण करने की क्षमता का माप है। अर्थात सापेक्ष आर्द्रता से यह ज्ञात होता है कि हवा संतृप्त होने के कितनी करीब या दूर हैं। सापेक्ष आर्द्रता को प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है। क्योंकि यह एक अनुपात है। इसकी कोई इकाई नहीं होती है।
सापेक्ष आर्द्रता तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होती है। अर्थात तापमान के बढ़ने से सापेक्ष आर्द्रता कम होती है और तापमान के कम होने से सापेक्ष आर्द्रता बढ़ जाती है। इसके अनुसार हवा जितनी ठंडी होगी जलवाष्प धारण करने की क्षमता कम हो जाएगी और उसे संतृप्त करना आसान होता है। सर्दियों में पृथ्वी ठंडी होती है तो इसके संपर्क में आने वाली हवा भी ठंडी होती है। जिससे सापेक्ष आर्द्रता बढ़कर अधिकतम हो जाती है और हवा में उपस्थित जलवाष्प संघनित होकर पानी की बूंदों का रूप ले लेती है। ये बूंदे हल्की होने के कारण हवा में तैरती रहती है जो दृश्यता में अवरोध उत्पन्न करती है।
ड्यू पॉइंट या ओंस बिंदु
तापमान का वह मान जिस पर हवा में उपस्थित जलवाष्प संघनित होकर बूंदों में परिवर्तित होती हैं। ड्यू पॉइंट या ओंस बिंदु कहलाता है।
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ओंस बिंदु वायुदाब पर निर्भर करता है। दाब कम होने के साथ समान जलवाष्प वाली हवा का ओंस बिंदु भी कम हो जाता हैं। वायुमंडल में ऊंचाई बढ़ने पर दाब कम होता हैं। जिससे तापमान भी कम होता हैं और ओंस बिंदू तक पहुंच जाता हैं। जिससे हवा की जलवाष्प संघनित होकर बूंदों का रूप ले लेती हैं। जिससे बादल बनते हैं।
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स्मॉग (धुंध) क्या होता है?
यह दो शब्दों smoke और fog से मिलकर बनता है। जब हवा में नमी अधिक होती है और इसमें धुंआ, प्रदूषण, धूल के कण आदि मिल जाते है तो स्मॉग बनता है। सरल शब्दों में कोहरा और धुँआ मिलकर स्मॉग बनता है। स्मॉग मानवजनित होता है। हालाँकि प्राकृतिक कारणों से जंगल की आग और ज्वालामुखी आदि से भी स्मॉग बनता है। स्मॉग एक गंभीर वायु प्रदुषण है। यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। इससे त्वचा, श्वास और आँखों से सम्बन्धित स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती है।
स्मॉग के प्रकार
स्मॉग दो प्रकार का होता है।
1 क्लासिकल स्मॉग
2 फोटोकेमिकल स्मॉग
क्लासिकल स्मॉग
इसे सल्फ्यूरिक स्मॉग भी कहते है। क्योंकि यह कोयले या बायोमास ईंधन के जलने के कारण सल्फर डाई ऑक्साइड SO2 युक्त धुंए के नमीयुक्त हवा में मिलने से बनता है।
यह अक्सर सर्दियों में बनता है। उत्तर भारत में बनाने वाला स्मॉग इस प्रकार का स्मॉग होता है।
इसकी प्रकृति अपचायक Reducing होती है।
1952 में लंदन में इस स्मॉग के कारण फैले भीषण वायु प्रदुषण से हजारों लोग मारे गए थे। इस कारण इसे लंदन स्मॉग भी कहते है।
क्लासिकल स्मॉग से साँस लेने में समस्या होती है।
फोटोकेमिकल स्मॉग
यह कारखानों, वाहनों आदि से निकले नाइट्रोजन के ऑक्साइड (NOx ) युक्त धुएं और वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (VOC) के सूर्य के प्रकाश में प्रकाश रासायनिक क्रिया के फलस्वरूप बनता है।
इसके लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक होता है। अतः यह गर्मियों और शुष्क जलवायु में अधिक बनता है।
फोटोकेमिकाल रिएक्शन से ओजोन बनता हैं जो एक खतरनाक प्रदूषक हैं।
फोटोकेमिकाल स्मॉग की प्रकृति ऑक्सीकारक होती है।
फोटोकेमिकल स्मॉग से आँखों और त्वचा पर जलन होती है ।
मिस्ट (कुहासा), फोग (कोहरा) पाला(फ्रॉस्ट) एवं स्मॉग (धुंध) में अंतर
मिस्ट, फोग, फ्रॉस्ट एवं स्मॉग समानार्थी शब्द लगते हैं। हम अक्सर इन चारों को एक ही समझने की गलती करते हैं। लेकिन इनके वास्तविक अर्थ काफी भिन्न है।
मिस्ट (कुहासा)
यह हवा में नमी की उपस्थिति के कारण होता है। पानी की बूंदे काफी छोटी और विरल होती है। जिससे दृश्यता में अधिक अवरोध उतपन्न नहीं होता है। इसमें दृश्यता 1 किमी से अधिक बनी रहती है। इसे हल्का कोहरा कहा जा सकता है।
फोग (कोहरा)
यह भी हवा में नमी की उपस्थिति के कारण होता है। इसमें पानी की बुँदे अपेक्षकृत बड़ी और सघन होती है। जिससे दृश्यता में अधिक अवरोध उतपन्न होता है। 1 किलोमीटर से कम दृश्यता होने पर कोहरा कहलाता है।
पाला(फ्रॉस्ट)
अत्यधिक कम तापमान 0 डिग्री के आसपास या इससे और कम तापमान पर हवा की नमी सीधे बर्फ के क्रिस्टल में बदल जाती हैं। यह ऊर्ध्वपातन प्रक्रिया से होता हैं। इसमे वाष्प बिना जल में बदले सीधे बर्फ में बदल जाती हैं। पाला फसलों के लिए अत्यधिक हानिकारक होता हैं।
स्मॉग (धुंध)
यह दो शब्दों smoke और fog से मिलकर बनता है। जब हवा में नमी अधिक होती है और इसमें धुंआ, प्रदूषण, धूल के कण आदि मिल जाते है तो स्मॉग बनता है। मिस्ट कुहासा, फ्रॉस्ट एवं फोग कोहरा तीनों प्राकृतिक कारणों से बनाते है। जबकि स्मॉग मानवजनित होता है।
कोहरे के दुष्प्रभाव
- कोहरे से दृश्यता में कमी आती है। कई बार तो दृश्यता 10-20 मीटर तक रह जाती हैं। दृश्यता में कमी से सड़क दुर्घटनाएं बहुत आम हैं।
- यातायात बुरी तरह प्रभावित होता हैं। कोहरे के कारण बस, ट्रेन और वायुयान देरी से चलते हैं। इन्हें कई बार समय परिवर्तन और रद्द भी करना पड़ता हैं।
- कोहरे के कारण कई बार स्कूल बंद रहते हैं जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती हैं।
- कोहरे के कारण व्यवसायिक गतिविधियां प्रभावित होने से आर्थिक नुकसान होता है।
- कोहरे के समय पर कार्यस्थल पर नही पहुँचने या कार्यस्थल पर काम बाधित होने के कारण मानसिक अशांति, चिड़चिड़ापन आदि समस्याएं हो सकती हैं।
- कोहरे में अधिक देर तक रहने से सर्दी जुखाम, खासी बुखार आदि समस्याएं हो सकती हैं।
- कोहरे के कारण फसलों और अन्य वनस्पति को सूर्य की रोशनी नही मिलने से प्रकाश संश्लेषण नही या कम होता हैं। जिससे फसलों में नुकसान होता हैं।
- अत्यधिक कम तापमान के कारण कोहरे की वाष्प सीधे बर्फ की बूंदों में बदल जाती हैं। जिसे पाला कहते है। इससे फसलों को भारी नुकसान होता हैं।
- कोहरा यदि स्मॉग के रूप में हो तो इससे आंखों और त्वचा में जलन व खुजली हो सकती हैं। श्वास सम्बंधी बीमारियां जैसे अस्थमा, त्वचा सम्बन्धी बीमारियां आदि हो सकती हैं।
कोहरे के दुष्प्रभावों को कैसे कम करें?
- सड़क पर थर्मोप्लास्टिक पेंट की चमकीली पट्टी कोहरे में भी दूर तक दिखाई देती हैं। सभी सड़को पर यह पट्टी अनिवार्य करनी चाहिए और इसका नियमित संधारण करना चाहिए। कोहरे के कारण कम दृश्यता में भी इस पट्टी की सहायता से वाहन चलाना आसान होता हैं।
- कोहरे में वाहनों की हेडलाइट/फोग लैंप और वार्निंग लाइट चालू रखें। जिससे सामने वाले को आपका वाहन अच्छे से दिखाई देगा और दुर्घटना की सम्भावना कम होगी।
- घर से बाहर जाते समय मास्क का प्रयोग करें।
- फसलों को कोहरे/पाले से बचाने के लिए पूर्वानुमान के आधार पर हवा की दिशा की ओर सुबह 5-6 बजे लकड़ियां जलाकर कोहरे/ पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता हैं।
- अंकुरण या छोटे पौधों को पॉलिथीन की लो टनल बनाकर कोहरे/पाले से बचाया जा सकता हैं।
- घने कोहरे की स्थिति में अनावश्यक परिवहन से बचें।
- वर्क फ्रॉम होम का विकल्प उपलब्ध होने पर इसे अपनाएं।
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