विश्व वन दिवस 2026
प्रतिवर्ष 21 मार्च को विश्व वन दिवस मनाया जाता है। खाद्य और कृषि संघठन की रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में 1990 से अब तक पिछले 35 सालों में हमने 20.33 लाख वर्ग किलोमीटर वनावरण खो दिया हैं। जो भारत के क्षेत्रफल का लगभग दो तिहाई हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 28 नवंबर 2012 के प्रस्ताव द्वारा आमजन में वनों और वृक्षों के महत्व समझने और वन संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष विश्व वन दिवस 2026 मनाना तय हुआ। विश्व वन दिवस 2026 पहली बार 21 मार्च 2013 को मनाया गया।
विश्व वन दिवस 2026 थीम
हर वर्ष विश्व वन दिवस एक विशेष थीम या टैगलाइन के साथ मनाया जाता है। विश्व वन दिवस 2026 की थीम वन और अर्थव्यवस्थाएं हैं।
विश्व वन दिवस 2025 की थीम वन और भोजन थी।
वन और अर्थव्यवस्थाएं
वन अर्थव्यवस्था का छुपा हुआ इंजन हैं। वन प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से स्थानीय और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं का पोषण और संरक्षण करते हैं। इसे हम निम्न बिंदुओं से समझते हैं-
1. राजस्व प्राप्ति
किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में वनों से होने वाली राजस्व प्राप्ति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। वनों से इमारती लकड़ी अन्य वन उपज और उद्योगों के लिए कच्चा माल प्राप्त होता है। कागज, फर्नीचर, प्लाईवुड, रबर आदि उद्योग पूर्णतः वनों पर आधारित वृहत उद्योग है। लाख, गोंद, रेजिन, मोम, शहद, रंजक, रेशम, फल, मेवे, औषधियां आदि लघु वन उपज आदिवासी क्षेत्रों में आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
2. कृषि अर्थव्यवस्था में योगदान
पेड़ों की जड़ें मिट्टी को जकड़ कर रखती है जिससे वन मृदा अपरदन को रोकते हैं। वनों के जैविक अपशिष्ट पत्ते आदि मिट्टी के साथ मिलकर इस उपजाऊ बनाते हैं। वन वर्षा को आकर्षित करते हैं जिससे कृषि हेतु जल उपलब्ध होता है। वन बाढ़ को रोकने में सहायक होते हैं जिससे मैदानी भागों में फसलें बाढ़ से नष्ट होने से बचती है।
3. उद्योगों के लिए आवश्यक जलापूर्ति में सहायक
जल के बिना उद्योगों की कल्पना करना व्यर्थ है। उद्योगों में विनिर्माण प्रक्रियाओं, शीतलन आदि में भारी मात्रा में स्वच्छ जल की आवश्यकता होती है। उद्योग जल की आपूर्ति के लिए किसी नदी या जलाशय आदि स्वच्छ पानी के जल स्रोतों पर आश्रित होते हैं। वन वर्षा में सहायक होते हैं। यह वर्षा जल नदियों के माध्यम से उद्योगों को प्राप्त होता है।
4. पर्यटन उद्योग में योगदान
वन पर्यटन उद्योग को प्रत्यक्ष रूप से पोषित करते हैं। इस पर्यटन उद्योग में प्राकृतिक पर्यटन, इको-टूरिज्म वन आधारित पर्यटन जिससे राष्ट्रीय उद्यान, वन्य जीव अभ्यारण, हिल स्टेशन आदि का महत्वपूर्ण योगदान होता है। वैश्विक पर्यटन में लगभग 50% योगदान पारिस्थितिकी पर्यटन का होता है। भारत में पर्यटन उद्योग जीडीपी में लगभग 9% का योगदान करता है जिसमे वन आधारित पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान हैं। भारत मे कुल रोजगार सृजन में लगभग 13.5% के योगदान के साथ पर्यटन सबसे बड़े रोजगार सृजको में से एक हैं।
5. हरित और टिकाऊ अर्थव्यवस्था
वन उद्योगों द्वारा उत्सर्जित कार्बन को अवशोषित करके कार्बन सिंक का कार्य करते हैं। उद्योगों को अपने कार्बन फुटप्रिंट को उदासीन करने के लिए उत्सर्जन के बराबर कार्बन क्रेडिट में निवेश करना होता है। यह कार्बन क्रेडिट उन व्यक्तियों या संस्थाओं को मिलता है जो वातावरण से कार्बन अवशोषित करने का काम करते हैं। इसमें पौधारोपण और वनीकरण मुख्य गतिविधियां शामिल होती है। अतः उद्योग अपने विकास और विस्तार हेतु कार्बन क्रेडिट में निवेश करके अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन की अनुमति प्राप्त करते हैं। जो अर्थव्यवस्था के विस्तार में सहायक है।
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6. हरित ईंधन
किसी भी अर्थव्यवस्था में ईंधन सबसे प्राथमिक आवश्यकता होती हैं। टिकाऊ अर्थव्यवस्था के लिए हरित ईंधन की अवधारणा विकसित हुई। इसमें परंपरागत ऊर्जा स्रोतों मुख्यतः जीवाश्म ईंधन को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों प्रतिस्थापित करना होता हैं। इसी दिशा में वनों से बायोमास ईंधन (लेंटाना, जूलिफ्लोरा आदि) का उपयोग किया जा सकता हैं। हाल ही में असम से गोलाघाट में बांस से एथेनॉल निर्माण का प्लांट स्थापित किया गया हैं। इथेनॉल एक स्वच्छ और हरित ईंधन है इसे पेट्रोल में मिलाया जाता है।
इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर विस्तृत आर्टिकल पढ़ें।
7. स्वस्थ मानव संसाधन में सहायक
किसी भी उद्योग और अर्थव्यवस्था को मानव संसाधन द्वारा ही संचालित किया जाता हैं। स्वस्थ अर्थव्यवस्था के लिए मानव संसाधन का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक होता है। वन ऑक्सीजन, स्वच्छ जल और औषधियां उपलब्ध करवा कर मानव संसाधन को स्वस्थ बनाए रखने में योगदान देते हैं। साथ ही इको टूरिज्म या वन आधारित भ्रमण मानव संसाधन को बेहतर मानसिक स्वाथ्य प्रदान करते हैं जिससे मानव संसाधन की उत्पादकता बनी रहती है।
विश्व में वनों की स्थिति
खाद्य एवं कृषि संगठन की रिपोर्ट GFRA(Global forest resources assessment) 2025 के अनुसार विश्व में वन क्षेत्र 414.02 लाख वर्ग किलोमीटर हैं जो कुल क्षेत्रफल का लगभग 32% है। वर्ष 1990 से लेकर अब तक पिछले 35 वर्षों में 20.33 लाख वर्ग किलोमीटर की कमी आयी हैं। वन क्षेत्र में गिरावट की वर्तमान दर 0.10% प्रतिवर्ष हैं।
विश्व में सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला देश रूस है जो 83.26 लाख वर्ग किलोमीटर के साथ विश्व का लगभग 20% वन क्षेत्र रखता हैं।
प्रतिशत के दृष्टिकोण से सर्वाधिक वन क्षेत्र फ्रेंच गुआना अपने क्षेत्रफल का 96% वन क्षेत्र रखता है जो कि 79820 वर्ग किलोमीटर हैं।
विश्व में प्रति व्यक्ति वन क्षेत्रफल लगभग 0.5 हेक्टर है।
वन क्षेत्र में बढ़ोतरी वाले शीर्ष तीन देश
- चीन(1686 ha प्रति वर्ष)
- रूस(952ha प्रति वर्ष)
- भारत(191ha प्रति वर्ष)
वन क्षेत्र में ह्वास वाले शीर्ष तीन देश
- ब्राज़ील(2942 ha प्रति वर्ष)
- अंगोला(510 ha प्रति वर्ष)
- तंजानिया(469 ha वर्ष)
विश्व मे सर्वाधिक पाए जाने वाले उष्णकटिबंधीय वर्षा वन जो कुल वनों का 45% हैं, कर्क रेखा और मकर रेखा के मध्य पाए जाते हैं। चित्र में वनों के प्रकार और उनका वितरण दर्शाया गया हैं।

पर्यावरण संतुलन के लिए न्यूनतम 33% भूभाग पर वनावरण होना आवश्यक है।
भारत में वनों की स्थिति
GFRA(Global forest resources assessment) रिपोर्ट 2025 के अनुसार
- कुल क्षेत्रफल के मामले में भारत विश्व में 9वे स्थान पर हैं। भारत में विश्व का लगभग 2 प्रतिशत वन क्षेत्र हैं।
- वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि की दृष्टि में भारत तीसरे स्थान पर है।
- वार्षिक वन क्षेत्र वृद्धि की दृष्टि में भारत तीसरे स्थान पर है।
- शीर्ष कार्बन सिंक देश में भारत पांचवें स्थान पर है।
वन स्थिति रिपोर्ट 2023 के अनुसार भारत में वन क्षेत्र और वृक्षावरण 8,27,357 वर्ग किलोमीटर हैं। यह देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17 प्रतिशत है जो 2021 में 24.62% था।
वन क्षेत्र 7,15,342.61 वर्ग किमी (देश के कुल क्षेत्रफल का 21.76%)
वृक्षावरण 1,12,014.34 वर्ग किमी (देश के कुल क्षेत्रफल का 3.41%)
कुल 8,27,357.05 वर्ग किमी
भारत मे प्रति व्यक्ति वन क्षेत्रफल लगभग 0.06 हेक्टर है जबकि वैश्विक औसत 0.5 हेक्टर है।
भारत मे शीर्ष वन क्षेत्र वाले राज्य
- मध्यप्रदेश (77073 वर्ग किमी, देश के कुल वन क्षेत्रफल का 9.32%)
- अरूणाचल प्रदेश (65882 वर्ग किमी, देश के कुल वन क्षेत्रफल का 7.96%)
- छत्तीसगढ़ (55812 वर्ग किमी, देश के कुल वन क्षेत्रफल का 6.75%)
पिछले दो वर्षों में(2021-2023) भारत मे वनावरण(156.41 वर्ग किमी) और वृक्षावरण(1289.4 वर्ग किमी) मिलाकर कुल 1445.81 वर्ग किमी की वृद्धि दर्ज की गई।
अधिकतम वृद्धि 2021-2023 (वन एवं वृक्षावरण) वाले शीर्ष तीन राज्य
- छत्तीसगढ़ (684 वर्ग किमी)
- उत्तर प्रदेश (559 वर्ग किमी)
- ओडिशा (559 वर्ग किमी)
सबसे ज़्यादा कमी (2021-2023) वाले शीर्ष तीन राज्य
- मध्यप्रदेश (612.41 वर्ग किमी)
- कर्नाटक (459.36 वर्ग किमी)
- लद्दाख (159.26 वर्ग किमी)
- नागालैंड (125.22 वर्ग किमी)।
देश का वन कार्बन स्टॉक 7,285.5 मिलियन टन अनुमानित है, जो वर्ष 2021 की तुलना में 81.5 मिलियन टन अधिक है।
राष्ट्रीय वन नीति 1988 के अनुसार पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने के लिए भारत में कुल क्षेत्रफल का 33% वन क्षेत्र होना चाहिए। इसके तहत मैदानी क्षेत्रों में 33% और पहाड़ी क्षेत्रों में 66% न्यूनतम वन क्षेत्र होना निर्धारित किया गया था।
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