किसी स्थान का तापमान कैसे नापा जाता है?


आजकल सर्दियों का मौसम हैं। प्रतिदिन न्यूज़ में आता हैं कि इस स्थान का तापमान जीरो डिग्री पहुंच गया हैं या फिर इस स्थान का अधिकतम या न्यूनतम तापमान इतना हैं। हम सभी के मोबाइल में एक वेदर एप्लीकेशन जरूर होता है जो तापमान, आद्रता, वर्षा, वायुदाब, हवा का वेग आदि मौसम के विभिन्न पहलुओं की जानकारी देता हैं।
आइए आज जानते हैं कि तापमान क्या होता है? तापमान कैसे नापा जाता हैं और तापमान को कौन नापता हैं?

तापमान क्या होता हैं?


तापमान किसी भी वस्तु या स्थान के गर्म और ठंडा होने का माप होता है अर्थात तापमान से हमें यह पता चलता है कि कोई वस्तु या स्थान कितना गर्म है या कितना ठंडा हैं। यह एक भौतिक राशि हैं जो किसी पदार्थ की गर्मी या ठंड की मात्रात्मक विशेषता को बताती हैं। तापमान को थर्मामीटर की सहायता से नापा जाता हैं तापमान को दैनिक अनुप्रयोगों में सामान्यतया डिग्री सेल्सियस मे नापा जाता हैं जबकि इसकी निरपेक्ष इकाई केल्विन हैं।

तापमान की वैज्ञानिक परिभाषा


तापमान, किसी पदार्थ को बनाने वाले परमाणुओं की औसत गतिज ऊर्जा को दर्शाता हैं। जब परमाणु तेज़ी से गति करते हैं, तो वे ज़्यादा गतिज ऊर्जा पैदा करते हैं और इसलिए ज़्यादा तापमान पैदा करते हैं।

किसी स्थान का तापमान कैसे नापा जाता है?


समाचार पत्रों में किसी स्थान विशेष के तापमान के आंकड़ों का प्रकाशन मौसम विज्ञान विभाग के अधिकृत स्रोत से नापा गया तापमान होता हैं वैसे तो उस स्थान पर प्रत्येक वस्तु का तापमान भिन्न भिन्न हो सकता हैं जैसे पानी के तापमान और रेत के तापमान में अंतर हो सकता हैं लेकिन मौसम विज्ञान में किसी स्थान विशेष का तापमान उस स्थान पर पृथ्वी की सतह से 1.2 मी या 4फीट ऊपर हवा का तापमान होता हैंं। गर्मी में मरुस्थल में रेत का तापमान वहां के हवा के तापमान से अधिक हो सकता हैं। इसी प्रकार सर्दियों में जमीन पर गिरी बर्फ का तापमान वहां की हवा के तापमान से भिन्न हो सकता हैं।

मोबाइल के वेदर एप्लीकेशन में तापमान का डाटा कहां से आता हैं?


वैसे तो आजकल सभी मोबाइलों में तापमान नापने के सेंसर होते हैं लेकिन केवल मोबाइल डिवाइस का ही तापमान नाप सकते हैं हालांकि आजकल कुछ मोबाइल बाहरी तापमान मापी सेंसर के साथ भी आते हैं जिससे किसी वस्तु का तापमान मोबाइल स्पर्श करवा कर या पास ले जाकर ज्ञात किया जा सकता हैं लेकिन वेदर एप्लीकेशन में किसी स्थान विशेष का तापमान का डाटा सेटेलाइट द्वारा नापा गया तापमान होता हैं। सैटेलाइट विद्युत चुंबकीय विकिरण का इस्तेमाल तापमान मापने के लिए करते हैं। वेवलेंथ जितनी छोटी, तापमान उतना ही ज्यादा होता हैं।
वर्तमान में, दो प्रचलनात्मक मौसम संबंधी उपग्रह INSAT-3D और INSAT-3DR हैं। जिसमें पृथ्वी की तस्वीर लेने के लिए 6 चैनल इमेजर लगे हैं। भू-स्थानिक उपग्रहों अर्थात् इनसेट -3 डी और इनसेट -3 डीआर से सीधे डेटा प्राप्त करने के लिए पृथ्वी पर एक समर्पित स्टेशन का उपयोग किया जाता हैं। इन उपग्रहों से प्राप्त डेटा को मौसम विज्ञान डेटा प्रोसेसिंग (IMDPS) प्रणाली में संसोधित किया जाता हैं।
मौसम उपग्रह सीधे तापमान नहीं मापते बल्कि तापमान मापने के लिए पृथ्वी की सतह या किसी वस्तु से अलग-अलग तरंगदैर्ध्य बैंड में निकलने वाले अवरक्त विकिरणों (इन्फ़्रारेड) को मापते हैं तथा उस स्थान से निकलने वाली ऊष्मा की मात्रा का अनुमान लगाते हैं। बाद में मौसम विज्ञान डाटा प्रोसेसिंग प्रणाली में इस डाटा को प्रोसेस करके तापमान के रूप में प्रदर्शित किया जाता हैं मौसम विज्ञान के सेटेलाइट इंफ्रारेड विकिरण आधारित होते हैं क्योंकि पृथ्वी की सतह का तापमान ज़्यादातर ऊर्जा इन्फ़्रारेड क्षेत्र में उत्सर्जित करता हैं।


दैनिक जीवन में तापमान का महत्व


हमारे दैनिक जीवन में तापमान का बड़ा महत्व होता हैं। घर से बाहर निकलते समय बाहर के तापमान का ख्याल अक्सर दिमाग में आता हैं कि बाहर बहुत गर्मी होगी या बहुत ठंड होगी। हमारा पहनावा भी तापमान के अनुसार होता हैं। हम कुछ चीजें सर्दी में खाना पसंद करते हैं और कुछ चीजें गर्मी में। किसी चीज को गर्म खाया जाता हैं वहीं दूसरी ओर किसी चीज को ठंडा खाया जाता हैं। कुछ फसलें सर्दी के मौसम में पैदा होती हैं तो कुछ फसलें गर्मी के मौसम में पैदा होती हैं। इस पृथ्वी पर जीवन की प्रत्येक प्रजाति तापमान की एक सीमित रेंज में की जीवित रह सकती हैं। औसत तापमान में मामूली वृद्धि या गिरावट किसी भी प्रजाति को व्यापक रूप से प्रभावित करती हैं। उदाहरण के लिए वैश्विक औसत तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि से मूंगा(कोरल) की लगभग 90% प्रजातियां नष्ट हो जाएगी। इसी प्रकार वैश्विक औसत तापमान में 3 डिग्री की वृद्धि से 41% स्तनधारी अपने आधे आवास खो देंगे।

तापमान मापने की इकाइयां


वैसे तो दैनिक जीवन में हम तापमान को डिग्री सेल्सियस में नापते हैं। सेल्सियस का पैमाना लगभग सभी देशों में मानक हैं जिसे मेट्रिक प्रणाली में काम में लिया जाता हैं वहीं संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोप के कुछ देशों में फारेनहाइट पैमाना काम में लिया जाता हैं। तापमान का केल्विन पैमाना निरपेक्ष तापमान नापता हैं यह वैज्ञानिक ताप मापन में अंतरराष्ट्रीय मानकों में मान्यता प्राप्त हैं।
डिग्री सेल्सियस में पानी सामान्य दाब पर जीरो डिग्री पर बर्फ में जमता है तथा 100 डिग्री सेल्सियस पर उबल कर वाष्प में बदलता हैं। पानी के बर्फ पिघलने से लेकर भाप में बदलने तक के तापमान को 100 इकाइयों में विभाजित कर डिग्री सेल्सियस का पैमाना निर्धारित किया गया हैं।
तापमान मापन की केल्विन इकाई वैज्ञानिक गणनाओं में प्रयुक्त की जाने वाली इकाई हैं। यह इकाई परम शून्य अर्थात न्यूनतम संभव तापमान को नाप सकती हैं जो कि जीरो केल्विन होता हैं। जिसका डिग्री सेल्सियस में मान -273.15 डिग्री सेल्सियस होता हैं। इस पैमाने पर जीरो डिग्री सेल्सियस का अर्थ 273.15 केल्विन होता हैं। पानी का क्वथनांक 373.15 केल्विन होगा। परम शून्य तापमान से अर्थ हैं कि इससे और कम तापमान नही हो सकता हैं। परम शून्यता पर किसी भी आदर्श गैस का आयतन शून्य होता हैं।
फारेनहाइट को डिग्री सेल्सियस मे निम्न फार्मूले से बदला जा सकता हैं (F-32)5/9
इस सूत्र के अनुसार 32 डिग्री फारेनहाइट जीरो डिग्री सेल्सियस के बराबर होता हैं तथा माइनस 40 डिग्री सेल्सियस माइनस 40 फॉरेनहाइट होती हैं अर्थात दोनों इकाइयां बराबर होती हैं।

थर्मामीटर क्या होता हैं?


तापमान नापने के कई तरीके प्रचलित हैं लेकिन सबसे साधारण तरीका मरकरी अर्थात पारे का थर्मामीटर हैं। मरकरी एक ऐसी धातु हैं जो तापमान के साथ आयतन में रेखीय प्रसार का गुण दर्शाती हैं। अर्थात मरकरी का आयतन तापमान के समानुपाती होता हैं मरकरी के इस गुण को उपयोग में लेकर थर्मामीटर का निर्माण हुआ हैं।
मरकरी थर्मोमीटर के अतिरिक्त थर्मोकपल, थर्मिस्टर, थर्मल रजिस्टर, रेजिस्टिव टेंपरेचर डिवाइस(RTD), इंफ्रारेड सेंसर आदि कई अन्य तरीके हैं जो व्यावहारिकता और आवश्यक परिशुद्धता के अनुसार उद्योगों और रिसर्च में काम में लिए जाते हैं।

एनालॉग एवं डिजिटल थर्मामीटर


एनालॉग थर्मामीटर वह होता है जो एक पूर्णांक से दूसरे पूर्णांक तक भिन्न के सभी मानों को स्पर्श करता हैं। साधारण मरकरी थर्मामीटर एनालॉग थर्मामीटर का उदाहरण हैं।
डिजिटल थर्मामीटर तापमान को सीधे गणितीय अंकों में प्रदर्शित करता हैं। जैसे हमारे मोबाइल पर तापमान का डाटा प्रदर्शित होता हैं। आजकल डिजिटल थर्मामीटर का प्रचलन बढ़ गया हैं एनालॉग मरकरी थर्मामीटर की तुलना में डिजिटल थर्मामीटर अच्छे माने जाते हैं मरकरी थर्मामीटर का नुकसान यह भी है मरकरी अर्थात पारा जो एक विषाक्त धातु हैं जो दुर्घटनावश मानव के संपर्क में आकर खतरनाक न्यूरोलॉजिकल बीमारी मीनामाता का कारण हैं।

हमारे शरीर का तापमान कितना होता हैं?


स्वस्थ मानव शरीर का तापमान लगभग 98.6 डिग्री फारेनहाइट या 37 डिग्री सेल्सियस होता हैं। 100.4 डिग्री फॉरेनहाइट तापमान सामान्य बुखार को दर्शाता हैं एवं 103 डिग्री फारेनहाइट उच्च श्रेणी की बुखार को दर्शाता हैं। 95 डिग्री फॉरेनहाइट से कम तापमान भी चिंताजनक होता हैं।

पृथ्वी का औसत तापमान कितना हैं?


नासा के अनुसार पृथ्वी का औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस हैं जो कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण लगातार बढ़ रहा हैं। 1850 से लेकर अब तक औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढा हैं। लेकिन वर्तमान में तापमान बढ़ोतरी की दर में वृद्धि हुई हैं तथा सन 2050 तक 2 से 4 डिग्री बढ़ाने की आशंका हैं।

ऊंचाई के साथ तापमान में बदलाव


जैसे-जैसे हम पृथ्वी की सतह से ऊंचाई पर जाते हैं तापमान में गिरावट दर्ज की जाती हैं। इसे लेप्स रेट कहते हैं जिसका मान पृथ्वी की सतह पर लगभग 6 डिग्री सेल्सियस प्रति किलोमीटर होता है अर्थात पृथ्वी की सतह से 1 किलोमीटर की ऊंचाई पर जाने पर तापमान लगभग पृथ्वी की सतह से 6 डिग्री कम होगा। सामान्य दशाओं में 30 से 40 हजार फिट की ऊंचाई पर उड़ान भर रहे वायुयान के बाहर का तापमान माइनस 30 से माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक होता हैं।

पृथ्वी पर सबसे गर्म और ठंडा स्थान


पृथ्वी का सबसे गर्म स्थान डेथ वैली हैं जो अमेरिका की कैलिफोर्निया में हैं। यहां पर अधिकतम तापमान 56.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
पृथ्वी का सबसे ठंडा स्थान अंटार्कटिका हैं अंटार्कटिका वोस्टॉक रिसर्च स्टेशन पर न्यूनतम तापमान 89.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।


Leave a reply to कृत्रिम वर्षा कैसे होती है? – Dhakad blogs Cancel reply

One response to “तापमान क्या है और कैसे मापा जाता है?”