इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल

जब तक पृथ्वी इंसानों से विहीन थी तब तक यह बहुत सुंदर हुआ करती थी। पृथ्वी पर सिर्फ प्राकृतिक चीजें नदी-नाले, झरने, पहाड़, मैदान, समुद्र आदि स्वच्छ हुआ करते थे। लेकिन जनसंख्या वृद्धि और मानव विकास के साथ-साथ हमने इन अमूल्य प्राकृतिक धरोहरों को लगातार प्रदूषित किया है। प्राकृतिक जंगलों का स्थान सीमेंट के जंगलों ने ले लिया है। चारों ओर गंदगी, कचरे के ढेर, नदी नालों में गंदा पानी, जहरीली हवा, समुद्र में तैरता प्लास्टिक प्रदूषण आदि हम इंसानों के होने और विकास का प्रमाण है। हम इंसानों ने पृथ्वी को पूरी तरह तहस नहस कर दिया है और आगे भी जारी है। क्या हम हमारी पृथ्वी के लिए ऐसा कुछ कर सकते हैं? जिससे यह पूर्व की भांति सुंदर बनी रहे। इसके लिए हम सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी और अपनी जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके हम हमारी पृथ्वी को सुंदर और प्रदूषण मुक्त बनाने में योगदान दे सकते हैं।  इस पोस्ट में हम इको फ्रेंडली जीवन शैली की आवश्यकता, लाभ, विधियों, चुनौतियों और समाधान पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

परिभाषा 

ऐसी जीवन शैली जिसमें पर्यावरण न्यूनतम प्रभावित हो इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल या पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली कहलाती है। इसमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारीपूर्ण और मर्यादित आचरण करना होता है। जिसमें न्यूनतम अपशिष्ट उत्सर्जन, संसाधनों का न्यूनतम एवं तर्कसंगत उपभोग, नवीनीकरण ऊर्जा संसाधनों का उपयोग आदि शामिल होता है।

इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल की आवश्यकता

पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी

पर्यावरण में चारों ओर जितना भी प्रदूषण और गंदगी हैं। यह प्रदूषण किसी एक व्यक्ति द्वारा नहीं फैलाया गया बल्कि थोड़ा-थोड़ा सभी व्यक्तियों द्वारा इसमें योगदान दिया गया हैं। अगर इसे कम करना है तो इस कम करने में थोड़ा-थोड़ा योगदान सभी को देना होगा। प्रकृति से हम जितना प्राप्त करते हैं उतना लौटना भी हमारा नैतिक दायित्व है। 

संविधान में वर्णित मूल कर्त्तव्यों में अनुच्छेद 51A(g) के तहत प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करना हमारा मूल कर्तव्य है। पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली अपना कर हम दैनिक जीवन में छोटे-छोटे योगदान देकर पर्यावरण को स्वच्छ रख सकते हैं।

हमारी दैनिक गतिविधियों से ग्रीन हाउस गैसों और अन्य अपशिष्टों का उत्सर्जन होता है। पर्यावरण प्रदूषण और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन से पृथ्वी का औसत तापमान लगातार बढ़ रहा है। वर्तमान में पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि की दर 0.20 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक हो चुकी है। औद्योगिक युग की शुरुआत से पूर्व में यह 0.06 डिग्री सेल्सियस प्रति दशक थी और यह लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2050 तक पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ने का अनुमान है। इसे 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई रणनीतिक प्रयास किया जा रहे हैं। 

हम सभी अपशिष्ट उत्सर्जन और प्रदूषण फैलाकर पर्यावरण और वन्यजीवों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। अतः पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली पर्यावरण के प्रति व्यक्तिगत जिम्मेदारी और पर्यावरण संरक्षण में एक योगदान हो सकता है। हमारी पृथ्वी जीवन योग्य बनी रहे इसके लिए पर्यावरण अनुकूल आचरण परम आवश्यक है।

आर्थिक लाभ के लिए

इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल आर्थिक रूप से भी लाभप्रद होती है। जैसे हमारे घर से स्टेशन तक, घर से ऑफिस तक या अन्य छोटी दूरियों को पैदल चलकर या साइकिल से तय करने से यात्रा में होने वाला खर्च बचता है। इलेक्ट्रिक व्हीकल द्वारा की गई यात्रा जीवाश्म ईंधन आधारित यातायात की तुलना में बहुत सस्ती होती है। बिजली उपकरणों का कम उपयोग करके हम बिजली बिल में कटौती कर सकते हैं।

स्वास्थ्य लाभ के लिए

पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली के कई दीर्घस्थाई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। जैसे छोटी दूरियों को पैदल या साइकिल से तय करने से हम पैदल चलने या साइकिल चलाने के विभिन्न स्वास्थ्य लाभों को अर्जित कर सकते हैं। पैदल चलने से हृदय संबंधी बीमारियों, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हड्डियों की कमजोरी, मोटापा, तनाव आदि से राहत मिलती है। पर्यावरण अनुकूल पौधों से प्राप्त साधारण भोजन आधुनिक प्रोसेस्ड फूड से सस्ता होता है और स्वास्थ्यवर्धक भी होता है। लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियां चढ़ना स्वास्थ्य के लिए अच्छा अभ्यास हो सकता है।

प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण

 इस पृथ्वी पर हमारे उपयोग के लिए संसाधन सीमित है। इन्हीं को हमारी आने वाली पीढियां के लिए भी बचा कर रखना आवश्यक है। पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली में हम संसाधनों के न्यूनतम व तर्कसंगत उपयोग और सतत विकास को अपना कर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हैं।

इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल के लिए क्या करें?

1. पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा उपयोग

  •  परंपरागत और जीवाश्म ईंधन के स्थान पर नवीनीकरण ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करें। सौर ऊर्जा इसके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प है। विभिन्न सौर ऊर्जा उपकरणों जैसे सोलर चार्जर, सोलर कुकर, सोलर वॉटर हीटर, सोलर वाटर पंप, सोलर स्ट्रीट लाइट आदि उपयोग करें।
  • बिजली उपकरण उच्च दक्षता वाले ही खरीदें।
  • खरीदते समय उपकरण की स्टार रेटिंग और ऊर्जा खपत का विश्लेषण अवश्य करें। उच्च दक्षता और स्टार रेटिंग वाले उपकरण कम बिजली की खपत करते हैं।
  • एसी को एक डिग्री अधिक तापमान पर चलकर 6% ऊर्जा की बचत की जा सकती है।
  • किसी भी बिजली उपकरण जैसे पंखे, ब्लोवर, ऐसी, मिक्सी, स्पीकर आदि को अधिकतम क्षमता पर नहीं चलाएं। अधिकतम क्षमता पर चलने से उपकरण के खराब होने की संभावना भी अधिक रहती है।
  • ट्यूबलाइट और परंपरागत तापदीप्त तन्तु लैंप के स्थान पर आधुनिक एलइडी लाइट का उपयोग करें।
  • नाइट लैंप के स्थान पर 0.5 वाट के रंगहीन एलइडी लाइट का उपयोग करें।
  • खिड़कियां खुली रखने से दिन के समय लाइट की आवश्यकता नहीं होगी। इससे कमरा भी जल्दी ठंडा होगा जिससे पंखा कम स्पीड पर चलने पर भी ताजा ठंडी हवा देगा।
  • उपयोग में लेने के अतिरिक्त मोबाइल चार्ज का स्विच ऑफ रखें। उपयोग नही लेने पर भी मोबाइल चार्जर का स्विच ऑन होने से कुछ ऊर्जा ऊष्मा के रूप में नष्ट होती है। अतः उपयोग में नहीं लेते समय मोबाइल चार्जर का स्विच ऑफ रखकर कुछ ऊर्जा की बचत की जा सकती है।
  • गीजर से पानी गर्म करने के उपरांत स्विच बंद कर देवें। घरों में सोलर गीजर का उपयोग भी किया जा सकता है।
  • हर बार प्रेस किए हुए कपड़े पहनने के स्थान पर कपड़ों को दो बार धोने के उपरांत ही इस्त्री करें।
  • कपड़े सुखाने के लिए वाशिंग मशीन के स्पिन और ड्रायर का इस्तेमाल करने के स्थान पर धूप में सुखाएं।

2. टिकाऊ परिवहन

  • यात्रा के लिए कम प्रदूषण वाले या प्रदूषण मानकों का पालन करने वाले यातायात साधनों का प्रयोग करें। इलेक्ट्रिक व्हीकल इसके लिए सबसे उपयुक्त विकल्प है। 
  • सामुदायिक परिवहन के साधनों का उपयोग करें।
  • दैनिक जीवन की छोटी दूरियों के लिए साइकिल या इलेक्ट्रिक स्कूटी का प्रयोग करें। 
  • कार आदि वाहन की बैठक क्षमता पूर्ण होने पर ही उपयोग करें। 
  • एक ही दिशा में यात्रा करने वाले समूह समूह बनाकर सामूहिक परिवहन साधन का उपयोग करें।
  • अपनी कार या बाइक को यांत्रिक रूप से फिट रखें जिससे वे उत्सर्जन मानकों का पालन करें।
  • लंबी दूरियों के लिए ट्रेन से यात्रा करना पर्यावरण अनुकूल होता है। 
  • इको फ्रेंडली ट्रेवल या पर्यावरण अनुकूल यात्रा के बारे में अधिक जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।

3. न्यूनतम अपशिष्ट उत्सर्जन एवं अपनाएं।

  •  सिंगल यूज़ प्लास्टिक कैरी बैग, प्लास्टिक पानी की बोतल आदि का प्रयोग कम से कम करें। 
  • बाजार से नियमित खरीद की वस्तुओं के लिए अपना खुद का रीयूजेबल कैरी बैग रखें।
  • राशन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीद स्टॉक में करें जिससे प्लास्टिक पैकिंग और कैरी बैग का उपयोग कम होगा। जैसे साबुन तेल शैंपू आदि की बड़ी पैकिंग की खरीद से आर्थिक लाभ के साथ-साथ न्यूनतम अपशिष्ट उत्सर्जन होगा।
  • पुन उपयोग और पुनरचक्र योग्य सामग्री अपनाएं। घरों में वस्तुओं को यथा संभव पुनः उपयोग करने की परंपरा बनाएं। 
  • कचरा कचरा पात्र में ही डालें कचरा डालते समय कलर कोड जैसे गीला कचरा हरे पात्र में सूखा कचरा नील पात्र में और खतरनाक अपशिष्ट लाल पात्र में डालें। प्लास्टिक कचरे को जलाएं नही, इसे उचित कचरा पात्र में डालें।
  • आर्टिफिशियल परफ्यूम के स्थान पर प्राकृतिक इत्र का प्रयोग करें।
  • स्मोकिंग नही करें। 
  • स्वच्छता का ध्यान रखें।

4. न्यूनतम जल उपयोग

  • टॉयलेट में फ्लश आवश्यकता अनुसार ही चलाएं।
  • नहाते समय शावर का उपयोग कम से कम करें।
  • सेविंग करते समय या ब्रश करते समय नल को खुला नहीं रखें।
  • पानी टपकने वाली नलो को और लीकेज वाली पाइपलाइन लाइनों को दुरुस्त करवाएं।
  • कार, साइकिल, बाइक आदि को अनावश्यक रूप से बार-बार नहीं धोएं।
  • RO के वेस्ट पानी का उपयोग बर्तन धोने और घरों को साफ करने में करें।
  • बरसात के पानी को संग्रहित कर उपयोग करें।

5. पर्यावरण अनुकूल भोजन करें।

  • शाकाहारी और पौधों पर आधारित भोजन अपनाएं। पैकेज्ड फ़ूड कम से कम उपयोग मेले मे लें। शाकाहारी भोजन प्रोसैस्ड फूड और मांसाहारी भोजन की तुलना में सस्ता स्वास्थ्य वर्धक और पर्यावरण अनुकूल होता है।
  • ऑर्गेनिक फूड और घर के किचन गार्डन में उगाई हुई सब्जियां अधिक भरोसमंद और पर्यावरण अनुकूल होते हैं।
  • घर से बाहर जाते समय डिस्पोजेबल कप प्लेट आदि का प्रयोग नहीं करें। इनके स्थान पर कुल्हड़,पत्तों से निर्मित पत्तल दोनों का प्रयोग कर सकते हैं।
  • टिशू पेपर का प्रयोग कम से कम करें। हाथ धोने के बाद टिशू पेपर के स्थान पर रुमाल का प्रयोग किया जा सकता है।

6. पर्यावरण मानकीकृत वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग करें।

  • इको लेबल एक मानकीकरण प्रक्रिया है। यह स्टैंडर्ड भारतीय मानक ब्यूरो BIS द्वारा उन उत्पाद या वस्तुओं को दिया जाता है जो पर्यावरण के लिए अनुकूल है। अतः वस्तुएं खरीदते समय इको लेबल देख कर खरीदें। 
  • विभिन्न वाणिज्य कंपनियां और संगठन उनके वस्तुओं और सेवाओं के उत्पादन में कार्बन और अपशिष्ट उत्सर्जन और उसके निस्तारण के आधार पर ISO 14000 मानक प्राप्त होती हैं।  ISO 14000 श्रृंखला संगठनों को उनके पर्यावरणीय प्रदर्शन में सुधार करने और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व के निर्वहन के लिए पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली EMS स्थापित करने हेतु एक व्यवस्थित ढांचा प्रदान करती है। अतः वस्तुओं और सेवाओं की खरीद से पहले उत्पादक कम्पनियों के ISO 14000 स्टैंडर्ड अवश्य देखें।
  • स्थानीय समुदायों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प उत्पाद पर्यावरण के लिए अनुकूल और अधिक भरोसेमंद होते हैं।

7. घूमने के लिए नेचर हाइकिंग, ट्रैकिंग एंड कैम्पिंग अपनाएं।

नेचर हाइकिंग ट्रैकिंग और कैंपिंग पर्यावरण अनुकूल आउटडोर गतिविधियां हैं। जिसमें जंगलों, पहाड़ों और सुदूर क्षेत्रों में पैदल चलना, घूमना और वहां अस्थाई कैंप बनाकर ठहरना आदि शामिल होता है। ये गतिविधियां मनोरंजन और रोमांच के साथ-साथ प्राकृतिक वातावरण को निकट से देखने और समझने में भी मदद करती है। इससे प्रकृति और पर्यावरण के प्रति आकर्षण और सहानुभूति बढ़ती है। वर्तमान में ये गतिविधियां काफी लोकप्रिय हो चुकी है। अतः हम मनोरंजन और घूमने के लिए इस प्रकार की गतिविधियों का चयन कर सकते हैं।

8. वन्यजीवों का संरक्षण करें

प्राकृतिक स्थलों और वन्य जीव वाले क्षेत्रों में अपशिष्ट नहीं फैलाएं और अनावश्यक शोर उत्पन्न नहीं करें। वन्यजीवों को खाद्य पदार्थ नहीं खिलायें। वन्यजीवों को खाद्य सामग्री खिलाना भी उनकी प्राकृतिक जीवन शैली, दिनचर्या और खाद्य प्रणाली में परिवर्तन करता हैं। वन्य जीव संरक्षण के लिए यह नकारात्मक है और भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दंडनीय अपराध है। 

9. पर्यावरण पर अपने प्रभाव के प्रति सचेत रहें। 

अपनी जीवन शैली से पर्यावरण पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों का अध्ययन करें और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाएं। 

10. अपने कार्बन फुटप्रिंट को उदासीन करें। 

कार्बन फुटप्रिंट किसी व्यक्ति अथवा कंपनी द्वारा किसी गतिविधि के दौरान कुल ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन का मापन है। दैनिक गतिविधियों के दौरान सृजित कार्बन फुटप्रिंट के बराबर अन्य पर्यावरण हितकारी गतिविधियां संपादित करके या कार्बन फुटप्रिंट ऑफसेट में निवेश करके यात्रा के नकारात्मक पर्यावरण प्रभावों को उदासीन किया जा सकता है।

पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली की चुनौतियां और समाधान

1. सामाजिक प्रतिरोध और पर्यावरण के प्रति जागरूकता का अभाव

अभी तक इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल लोकप्रिय अवधारणा नही है क्योंकि समाज मे इसका कोई प्रत्यक्ष लाभ नही हैं। इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल लिए अपनी आदतों में कई बदलाव करने होते हैं। पर्यावरण के प्रति पर्याप्त समझ के अभाव में कुछ आदतों में बदलाव को समाज हेय दृष्टि से देखता हैं। जैसे पैदल चलने वाले को कंजूस कहा जा सकता हैं। या पर्यावरण अनुकूल साधारण भोजन करने वाले को रूढ़िवादी या पुराने जमाने का आदि कहा जा सकता हैं। इस प्रकार पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली अपनाने वाले व्यक्ति को सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ सकता है। समाज में पर्यावरण के प्रति अभी भी पर्याप्त शिक्षा और जागरूकता का अभाव हैं। इस कारण आमजन पर्यावरण के प्रति अपने व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं समझता है। अतः पर्यावरण के प्रति पर्याप्त जागरूकता के अभाव में परंपरागत जीवन शैली के स्थान पर पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली का चयन अव्यवहारिक और असहज महसूस होने के कारण समाज इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल को प्रमोट नहीं करता है।

2. उच्च लागत 

सामान्यतः इको फ्रेंडली वस्तुएं और सेवाएं परम्परागत वस्तुओं और सेवाओं से महंगी होती हैं। जैसे इलेक्ट्रिक कार पेट्रोल कार की तुलना के महंगी होती हैं। डिस्पोजल कप की तुलना में कुल्हड़ महंगा होता हैं। इस प्रकार साधारण आमदनी वाला तबका इको फ्रेंडली जीवनशैली को नहीं अपना सकता है।

3. अधिक समय लगना

वर्तमान के भागदौड़ भरी जिंदगी में प्रत्येक व्यक्ति अपना काम कम से कम समय में करना चाहता है। इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल में परम्परागत लाइफस्टाइल की तुलना किसी काम मे अधिक समय लग सकता हैं। जैसे घर से कार्यक्षेत्र, बाजार तक या अन्य छोटी दूरियों को पैदल तय करने में अधिक समय लगता हैं। लिफ्ट के स्थान पर सीढ़ियां चढ़ने में अधिक समय लगता हैं। 

4. कम आरामदायक 

 वैज्ञानिक और आर्थिक विकास के युग में हर कोई तकनीकी का उपयोग अपने कंफर्ट के लिए करना चाहता है। इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल परंपरागत जीवन शैली की तुलना में काम आरामदायक होती है। जैसे एसी का कम उपयोग या 1-2 डिग्री अधिक तापमान पर चलाना। नहाते समय शॉवर का उपयोग नहीं करना आदि।

समाधान 

समाज में पर्यावरण शिक्षा और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाकर इको फ्रेंडली जीवनशैली के अप्रत्यक्ष किंतु टिकाऊ और स्वास्थ्य लाभों से आमजन को जागरूक किया जाना चाहिए। साथ ही आमजन में पर्यावरण के प्रति अपने दायित्वों की समझ विकसित करनी चाहिए। सरकार को पर्याप्त नीतियां बना कर इको फ्रेंडली जीवन को इंसेंटिव या अनुदान देकर प्रमोट करना चाहिए। उदाहरण के लिए बिना एसी वाले घर के बिजली बिल में कुछ रियायत दी जा सकती है। 

मिशन लाइफ

मिशन लाइफ (Mission LiFE) “लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट” है, जो जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक जीवनशैली में बदलाव लाने पर केंद्रित एक वैश्विक पहल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2021 में COP26 में इसकी घोषणा की थी और 2022 में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की उपस्थिति में इसे लॉन्च किया गया। इस मिशन का उद्देश्य लोगों को पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा देना है, जिससे एक स्वस्थ ग्रह का निर्माण हो सके। 

मिशन लाइफ 75 दिनचर्या और व्यक्तिगत कार्यों की एक सूची प्रदान करता है, जिन्हें सात मुख्य विषयों के तहत बांटा गया है।

ये सात विषय हैं:-

  • पानी बचाओ। 
  • ऊर्जा बचाओ। 
  • कचरा कम करो। 
  • ई-कचरा कम करो। 
  • एकल-उपयोग प्लास्टिक कम करो। 
  • स्थायी खाद्य प्रणालियों को अपनाओ। 
  • स्वस्थ जीवनशैली अपनाओ। 

निष्कर्ष

हम हमारी दैनिक क्रियाओं के दौरान पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव छोड़ते हैं और प्रकृति प्रदत्त प्राकृतिक संसाधनों जो कि सिमित हैं, का अनैतिक विदोहन करते हैं। इनको आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बचा कर हमारी जिम्मेदारी हैं। जितना हम प्रकृति से लेते हैं उतना वापस देना भी हमारा नैतिक दायित्व बनता है। हम अपने दैनिक जीवन में छोटी-छोटी पर्यावरण अनुकूल पहल अपना कर पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं। इको फ्रेंडली लाइफस्टाइल भी एक पर्यावरण अनुकूल पहल हैं। इसे अधिक से अधिक व्यवहार में लाकर हम पर्यावरण को हमारे द्वारा होने वाले हानिकारक प्रभावों को कम कर सकते हैं।


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