
प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां– हमारा देश भारत त्योहारों का देश हैं। यहां पर गणेश उत्सव और नवरात्रि लंबे चलने वाले त्योहारों में से प्रमुख त्यौहार हैं। इन त्योहारों के दौरान गली मोहल्ले घरों में हर जगह पंडाल सजाकर गणेश जी की और दुर्गा माता की छोटी बड़ी सभी तरह की मूर्तियों की स्थापना की जाती है और त्योहार के अंतिम दिन प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां बड़े धूमधाम के साथ नदियों तालाबों आदि जल स्रोतों में विसर्जितकी जाती है।
विसर्जन के साथ ही शुरू होता है एक तर्क कि क्या प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियां जल को प्रदूषित करती है? तर्क का आधार है वह मटेरियल जिससे ये मूर्तियां बनाई जाती है। वह है प्लास्टर ऑफ पेरिस। कई राज्य सरकारों, नगर निकायों ने प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियों को जल स्थलों में विसर्जित करने पर रोक लगा दी है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस क्या होता है?
यह प्लास्टर ऑफ पेरिस वही पाउडर हैं जिसे हाथ पैर फैक्चर हो जाने पर अस्पताल में एक ठोस कठोर पट्टा बांधा जाता हैं जिससे कि चोट वाले स्थान से हड्डी को स्थिर रख सकें।
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस, जिप्सम से बना एक सफ़ेद पाउडर होता हैं इसे बनाने के लिए जिप्सम को उच्च ताप पर गर्म किया जाता है। प्लास्टर का पेरिस गीला होने पर जम जाता है और सूखने पर सख्त हो जाता है। इसी गुण के कारण यह मूर्ति बनाने के लिए सबसे उपयुक्त पदार्थ हैं क्योंकि इसे गीला करके सांचे में ढालना बहुत आसान हैं और तुरंत लगभग 10 से 15 मिनट में ठोस होने के कारण मूर्ति बनाने में समय भी कम लगता हैं।
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस का रासायनिक सूत्र CaSO4.1/2H2O होता हैं। इसका रासायनिक नाम कैल्शियम सल्फेट हेमीहाइड्रेट हैं। इसका नाम पेरिस में पाए जाने वाले जिप्सम की प्रचुरता से पड़ा हैं।
क्या प्लास्टर ऑफ पेरिस जल को प्रदूषित करता है?
क्योंकि यह एक दीर्घ स्थाई पदार्थ हैं जो जल में लंबे समय तक रहता हैं जो जल को गंदा करता हैं जिससे जल की पारदर्शिता कम हो जाती हैं और सूर्य की रोशनी जल स्रोत के अंदर नहीं जा पाती हैं और परिणाम स्वरूप् जल के अंदर की वनस्पति सूर्य के प्रकाश के अभाव में प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाती हैं और मर जाती हैं।
जब प्रकाश संश्लेषण की दर कम हो जाती हैं तो जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा भी कम हो जाती हैं जिससे जलीय जीवों को श्वसन हेतु आवश्यक ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो पाती हैं। वैज्ञानिक भाषा में बायोलॉजिकल ऑक्सीजन डिमांड बढ़ जाती हैं जो जल प्रदूषण का एक पैमाना हैं। इस प्रकार पूरा जलीय पारिस्थितिकी तंत्र बुरी तरह से प्रभावित होता है।
साथ ही यदि प्लास्टर ऑफ पेरिस युक्त जल को मवेशी और मनुष्य पीते हैं तो इससे जठरांत्र संबंधी रुकावट, जलन और पाचन तंत्र को नुकसान सहित गंभीर स्वास्थ्य जटिलताएं हो सकती हैं।
इन मूर्तियों पर केमिकल कलर किया जाता हैं जो जल में घुलकर मवेशियों और मानव के शरीर मे प्रवेश कर सकता हैं जो एक दीर्घ स्थाई प्रदूषक हैं और जैव संचयन का गुण दर्शाता है। यह कैंसर कारक भी हो सकता है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों पर सरकार का क्या कहना है?
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण की मूर्ति निर्माण की गाइडलाइन के अनुसार प्लास्टर का पेरिस से मूर्ति निर्माण और मूर्ति विसर्जन प्रतिबंधित किया गया है।
प्लास्टर ऑफ पेरिस के विकल्प?
- मिट्टी की मूर्तियां।
- गोबर से बनी मूर्तियां।
- लकड़ी या लकड़ी के बुरादे से निर्मित मूर्तियां।
- आटे से बनी मूर्तियां।
- वेस्ट टू आर्ट से बनी मूर्तियां भी एक विकल्प हो सकती हैं लेकिन इन्हें वेस्ट की प्रकृति के अनुसार जल में विसर्जित किया अथवा नहीं किया जा सकता हैं।
- सजावट के लिए फूलों और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग किया जा सकता हैं।
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सारांश
आइए देश के जिम्मेदार नागरिक और प्रकृति हितैषी होने का परिचय देते हैं। आज ही प्लास्टर ऑफ पेरिस को बाय-बाय कहते हैं। और आज के बाद इको फ्रेंडली मूर्तियों की स्थापना करने का संकल्प लेते हैं। नैसर्गिक सौन्दर्य को दूषित होने से बचाएं।




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