वायुदाब क्या होता है? यह कैसे मापा जाता है?
दैनिक जीवन में हम साइकिल, बाइक या कार के टायर में हवा भरते समय एक रीडिंग देखते हैं। यह वायुदाब का ही एक मात्रक होता है। वायुमंडलीय दाब वायुदाब का ही एक रूप है जिसे बैरोमीट्रिक दाब भी कहते हैं। इस पोस्ट में हम वायुदाब और वायुमंडलीय दाब क्या होते हैं? और कैसे मापे जाते हैं? दैनिक जीवन में वायुदाब का क्या महत्व होता है? आदि प्रश्नों के जवाब विस्तार से जानेंगे।
वायुदाब क्या होता है?
वायुदाब को समझने से पहले हम दाब को समझते हैं। हम किसी चीज को धक्का देते हैं या वजन डालते हैं तो उस वस्तु पर दाब लगता हैं। यही वजह या धक्का वायु द्वारा लगता हैं तो इसे वायुदाब कहते हैं। आइए और सरल शब्दों में समझते हैं। वायु विभिन्न गैसों के मिश्रण से बनी होती है प्रत्येक के सूक्ष्म अणुओं से बनी होती है जिसे अपना द्रव्यमान और भार होता है वायु का यही द्रव्यमान गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में वायुदाब उत्पन्न करता है।
सरल भाषा में गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से वायु के भार (वजन) के कारण किसी सतह पर उत्पन्न दबाव वायुदाब कहलाता है। वैज्ञानिक परिभाषा की बात करें तो एक निश्चित स्थान एवं निश्चित समय पर वायु के एक स्तंभ का भार वायुदाब कहलाता है।
वायु अपने संपर्क में आने वाली हर चीज पर दबाव डालती है। हम जहां पर खड़े हैं हमारे ऊपर की वायु का भार हमारे ऊपर पड़ता है लेकिन हम इसे महसूस नहीं कर पाए क्योंकि यह हमेशा बना रहता है लेकिन जब तेज हवा चलती है तो हम वायु प्रवाह की दिशा में दबाव महसूस करते हैं।
वायुदाब और वायुमंडलीय दाब में क्या अंतर होता है?
यहां पर वायुदाब और वायुमंडलीय दाब दोनों शब्द एक जैसे ही लगते हैं लेकिन उनके वास्तविक अर्थ काफी अलग है।
वायुमंडलीय दाब जिसे हम एटमॉस्फेरिक प्रेशर भी कहते हैं यह स्वतंत्र परिस्थितियों में प्राकृतिक वायुमंडल द्वारा किसी सतह पर लगाए जाने वाला वायुदाब होता है यह एक मुख्य मौसमी और जलवायवीय कारक है जो मौसम और जलवायु को व्यापक रूप से प्रभावित करता है।
वायुदाब जिसे हम एयर प्रेशर कहते हैं। यह एक मानव जनित या कृत्रिम रूप से नियंत्रित किया जाने वाला हवा का दबाव होता है। इसका औद्योगिक महत्व होता है तथा तकनीकी में व्यापक उपयोग होता है। उदाहरण के लिए साइकिल के टायर में भारी जाने वाली हवा का दबाव।
वायुदाब दाब कैसे मापा जाता हैं?
मौसम विज्ञान में वायुमंडलीय दाब को मापने के लिए बैरोमीटर का उपयोग किया जाता है। बैरोमीटर में पारे का उपयोग किया जाता है कांच की पतली नली में पारा भरा हुआ होता है और नली का शेष क्षेत्र निर्वात रखा जाता हैं, जो एक अधिक पृष्ठीय क्षेत्रफल वाली सतह वाले पात्र में भरे पारे से जुड़ा होता है। जब इस सतह पर हवा का दाब पड़ता है तो पारा नली में ऊपर चढ़ता है और दबाव को होने पर पारा नली में नीचे गिरता है। नली पर पैमाना अंकित होता है। पारे के विस्थापन के स्तर से गणितीय मान प्राप्त होता है।

आधुनिक और डिजिटल बैरोमीटर सेंसर का उपयोग करके वायुदाब को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करके वायुदाब का डिजिटल मान दर्शाते हैं।
वायुदाब मापन की इकाइयां
वायुमंडलीय दाब जिसे बैरोमीट्रिक दाब भी कहते हैं। इसकी इकाई atm एटीएम होती हैं। जबकि दाब की SI इकाई पास्कल होती है। प्रति ईकाई क्षेत्र पर लगने वाला बल पास्कल कहलाता है। इसकी इकाई न्यूटन प्रति वर्ग मीटर होती हैं।
समुद्र तल पर 15 डिग्री सेंटीमीटर तापमान पर जो वायुमंडलीय दाब होता है उसे सामान्य वायुमंडलीय दाब कहते हैं और इसे एक atm एटीएम (atmosphere) माना जाता है। बैरोमीटर के पार के स्तंभ पर यह 29.92 इंच या 760 मिमि के बराबर होता है। इस सामान्य वायुमंडलीय दाब का मान मिलीबार में 1013.25 mb होता है। 1 मिली बार प्रति वर्ग सेंटीमीटर क्षेत्रफल पर एक ग्राम द्वारा डाला जाने वाले दबाव के बराबर होता हैं।
1 atm = 29.92 inHg = 760 mmHg
1 atm = 1013.25 mb = 101.325 kPa
(1 bar = 10^5 Pascal)
1 Pascal = 1 N/m^2 न्यूटन प्रति वर्ग मीटर।
वायुदाब नापने की ब्रिटिश इकाई Psi पाउंड प्रति वर्ग इंच होती है। औद्योगिक और व्यापारिक क्षेत्र में इसी इकाई का प्रचलन है। वाहनों के टायरों में भारी जाने वाली हवा भी Psi में मापी जाती है।
1 atm = 14.696 Psi
1 Psi = 6894.76 Pa
वायुदाब को प्रभावित करने वाले कारक
ऊंचाई
ऊंचाई के साथ वायुमंडलीय दाब में कमी आती है क्योंकि ऊंचाई के साथ वायु का घनत्व कम होता है यानी वायुमंडलीय दबाव उत्पन्न करने वाले अणुओं की संख्या कम होती है। फल स्वरुप वायुमंडलीय दाब कम होता है। अतः हम कह सकते हैं कि वायुमंडलीय दाब ऊंचाई के व्युत्क्रमानुपाती होता है। वायुयान उड़ने की सामान्य ऊंचाई 10-12 किमी (33-40हजार फीट) पर वायुदाब लगभग 200-280 mmHg ही रह जाता हैं। यह सामान्य वायुदाब का 25-30 प्रतिशत ही होता हैं। वायुयान के भीतर वायुदाब कृत्रिम रूप से बनाए रखा जाता है।
ऊंचाई के साथ वायुदाब में परिवर्तन को आधार मानकर अल्टीमीटर किसी स्थान की ऊंचाई नापता है।
पृथ्वी का घूर्णन
पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन के फल स्वरुप उत्पन्न अपकेंद्रीय बल के कारण वायुमंडल की हवा बाहर धक्का महसूस करती हैं। इसका प्रभाव भूमध्य रेखा पर अधिक होने से यहाँ वायुदाब कम और उच्च अक्षांशों पर वायुदाब अधिक होता है।
तापमान
तापमान में वृद्धि से वायु फैलती है और उसका घनत्व कम हो जाता है। हवा के हल्के होने अर्थात घनत्व में कमी से वायुदाब घटता है। अतः हम कह सकते हैं कि वायुदाब तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है। लेकिन तापमान के बढ़ने से केवल वायुमंडलीय दाब कम होता है जबकि बन्द निकाय में तापमान के साथ वायुदाब बढ़ता हैं।
किसी बंद निकाय में हवा का तापमान बढ़ने से उस निकाय की सतह पर वायुदाब बढ़ जाता है। क्योंकि हवा गर्म होकर फैलती है लेकिन उसे फैलने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता है। अतः किसी बंद निकाय में वायुदाब तापमान के समानुपाती होता है। गर्मी के दिनों में गाड़ियों के टायरों का फटना इसी का उदाहरण है।
इसी प्रकार पानी को बॉटल का पिचक जाना बॉटल के अंदर की वायु के तापमान कम होने के कारण बॉटल के अंदर बाहर की अपेक्षा वायुदाब कम हो जाने के कारण बॉटल पिचक जाती हैं।
तापमान क्या होता है? यह कैसे मापा जाता है? जानने के लिए विस्तृत आर्टिकल पढ़ें।
वायु में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा
अधिक जलवाष्प की मात्रा वाली हवा का वायुदाब कम होता है। जबकि कम जलवाष्प की मात्रा वाली हवा का वायुदाब अधिक होता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जलवाष्प के अणु शुष्क हवा के अणुओं से हल्के होते हैं।
दैनिक जीवन मे वायुदाब का महत्व
मौसम का पूर्वानुमान
वायु उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है। इस कारण किसी स्थान के वायुदाब से मौसम का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
वायुदाब के अचानक गिरने से तेज हवा, आंधी, तूफान की संभावना होती है। निम्न वायुदाब के कारण ही मानसूनी हवा उस रिक्त स्थान को भरने के लिए पहुंचती है जिससे वर्षा होती है।
वायुदाब के बढ़ने से मौसम साफ और शांत रहता है।
यदि वायुदाब स्थिर रहता है तो निकट भविष्य मौसम में बदलाव की कोई संभावना नहीं होती है।
दैनिक जीवन में वायुदाब के अन्य अनुप्रयोग/प्रभाव
- पहाड़ों पर खाना बनाने में अधिक समय और पानी लगता है। क्योंकि वायुदाब कम होने से पानी 100 डिग्री सेंटीग्रेड से पहले ही उबलने लगता है और वाष्प में परिवर्तित हो जाता है। इसके विपरित प्रेशर कुकर में पानी अधिक दाब पर उबलता हैं। जिससे खाना जल्दी पकता हैं।
- गर्मी के दिनों में वाहनों के टायरों का फटना गर्मी के दिनों में तापमान बढ़ने से टायर के अंदर हवा का वायुदाब बढ़ जाता है। जो टायर की क्षमता से अधिक होने पर टायर फट जाता है।
- पहाड़ों या अधिक ऊंचाई वाले स्थान पर नाक से खून बहना। वायुमंडलीय दाब हमारे शरीर के आंतरिक दाब से कम होने पर खून उच्च दाब से निम्न दाब की ओर अर्थात नाक से बाहर निकलने लगता हैं।
- पहाड़ों पर अधिक ऊंचाई के कारण वायुदाब कम होने से ऑक्सीजन की मात्रा भी कम होती है जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। इस कारण पर्वतारोही अपने साथ ऑक्सीजन सिलेंडर ले जाते हैं।
अन्य उपकरण
वैक्यूम क्लीनर से सफाई करना, सिरिंज से दवाई या रक्त निकालना, स्ट्रॉ से पेय पदार्थ पीना, कम्प्रेशर से हवा स्टोर करना, हवा से ध्वनि उत्पन्न करने वाले वाद्य यंत्र आदि वायुदाब में अंतर के सिद्धांत पर काम करते हैं।
वायु, हवा और पवन में अंतर
वैसे व्याकरण की दृष्टि से ये तीनों पर्यायवाची शब्द है। लेकिन इनका वास्तविक अर्थ अलग अलग होता हैं।
वायु पृथ्वी के चारों ओर विभिन्न गैसों का मिश्रण जो सामान्य वायुमंडल है। जिससे हम सांस लेते हैं। यह स्थिर होता है।
हवा गतिशील वायु हवा कहलाती है।
पवन बहुत तेज गति से हवा चलती है उसे पवन कहते हैं।




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