एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल
एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल

भारत सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अनिवार्य कर दिया है। अब बिना एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का कोई विकल्प नहीं है। कई लोग इसे सरकार का तुगलकी फरमान बता रहे हैं। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के अपने कुछ फायदे हैं और कुछ नुकसान भी हैं। इसलिए यह एक विवाद का विषय बन गया है। इस पोस्ट में हम एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से जुड़े सभी बिंदुओं को विस्तार से समझेंगे।

इथेनॉल ब्लैडेट पेट्रोल क्या है?

यह पेट्रोल और एथेनॉल का मिश्रण है। पेट्रोल में एक निश्चित अनुपात तक एथेनॉल मिलाया जाता है। E10 पेट्रोल से तात्पर्य है कि पेट्रोल में 10% एथेनॉल मिलाया गया है इसी प्रकार E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% शुद्ध पेट्रोल होता है।

पेट्रोल में 15% या इससे अधिक एथेनॉल होने पर इसे फ्लेक्सी फ्यूल कहा जाता है।

इथेनॉल क्या है?

इथेनॉल पेट्रोल की तरह ही दिखने वाला एक द्रव ईंधन है। यह गन्ने, मक्का या अन्य स्टार्च अथवा शर्करा युक्त जैव उत्पादों के किण्वन से बनता है। यह एक नवीकरणीय जैव ईंधन है। इसलिए इसे ग्रीन फ्यूल भी कहा जाता है। एथेनॉल का रासायनिक सूत्र C2H5OH होता है। इसे एथिल अल्कोहल भी कहते हैं। यह सामान्य शराब ही होता है। इसका उपयोग पेय पदार्थ के रूप में नहीं हो इसलिए इसमें कुछ टॉक्सिंस मिलाए जाते हैं।

पेट्रोल में एथेनॉल क्यों मिलाया जाता है?

एथेनॉल एक नवीकरणीय, पर्यावरण अनुकूल और स्वच्छ जैविक ईंधन है। यह पेट्रोल की तुलना में स्वच्छ जलता है। यानी कि कम ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन करता है। जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति करने तथा कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भारत में वर्ष 2003 में पेट्रोल में एथेनॉल का मिश्रण शुरू किया गया था और इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जा रहा है।

भारत का एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम

भारत में वर्ष 2003 में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। उस समय 5% एथेनॉल मिश्रण शुरू किया गया था। वर्ष 2022 तक 10% तथा वर्ष 2030 तक 20% एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा गया था।

10% एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को निर्धारित समय से पूर्व ही पूरा कर लिया गया था।

राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति 2018 को वर्ष 2022 में संशोधित करते हुए 20% एथेनॉल मिश्रण के लक्ष्य को 2030 से घटाते हुए वर्ष 2025-26 तक लागू करना निर्धारित किया गया था। इसी के तहत वर्ष 2030 तक 27 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण E27 का लक्ष्य रखा गया है।

क्या एथेनॉल पेट्रोल से बेहतर ईंधन है?

पेट्रोल की तुलना में एथेनॉल के कुछ फायदे और कुछ कमियां हैं। इन्हें हम निम्न बिंदुओं से समझते हैं-

1. ऊर्जा घनत्व

पेट्रोल का कैलोरी मान 45000 KJ/Kg होता है, जबकि एथेनॉल का कैलोरी मान 29700 KJ/Kg होता है। अतः एथेनॉल पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा घनत्व रखता है।

E10 पेट्रोल

(45000 x 0.90) + (27900 x 0.10) = 43290 KJ/Kg

E20 पेट्रोल

(45000 x 0.80) + (27900 x 0.20) = 41580 KJ/Kg

उक्त गणना से स्पष्ट है कि 10% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में सामान्य शुद्ध पेट्रोल की तुलना लगभग 4% कम और 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में लगभग 8% कम ऊर्जा होती है।

अतः ऊर्जा घनत्व के संदर्भ में पेट्रोल इथेनॉल से बेहतर ईंधन है।

2. ऑक्टेन नंबर

भारत में सामान्य पेट्रोल का रिसर्च ऑक्टेन नंबर RON 90-95 तथा प्रीमियम पैट्रोल XP95 का रिसर्च ऑक्टेन नंबर 95 होता है।

99% शुद्ध एथेनॉल का ऑक्टेन नंबर RON 108-110 होता है। एथेनॉल मिश्रण पेट्रोल के लिए ऑक्टेन बूस्टर का काम करता है। अर्थात एथेनॉल मिश्रण पेट्रोल को बेहतर रिसर्च ऑक्टेन नंबर प्रदान करता है।

ईंधन का उच्च ऑक्टेन नंबर बेहतर इंजन प्रदर्शन और सुरक्षा प्रदान करता है। ऑक्टेन नंबर जितना अधिक होगा ईंधन का दहन उतना सुचारू रूप से होगा। उच्च ऑक्टेन नंबर नॉकिंग (खट खट की आवाज) को कम करता है। पेट्रोल में एथेनॉल एंटी नॉकिंग एजेंट के रूप में कार्य करता है।

अतः ऑक्टेन नंबर के संदर्भ में एथेनॉल पेट्रोल से बेहतर ईंधन है।

भारत में बेचे जाने वाले E20 पैट्रोल का न्यूनतम ऑक्टेन नंबर 95 होना अनिवार्य है।

3. ऑक्सीजन की मात्रा

इथेनॉल में पेट्रोल की तुलना में अधिक ऑक्सीजन होती है जिससे यह जलने में आसान होता है और कम अपशिष्ट उत्पन्न करता है। इसलिए एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल जलवायु और उत्सर्जन में कटौती लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बेहतर विकल्प है।

अतः दहन की गुणवत्ता के संदर्भ में इथेनॉल पेट्रोल से बेहतर इंधन है।

4. पानी की मात्रा

एथेनॉल जल में घुलनशील होता है इसलिए इससे जल को पृथक करना थोड़ा मुश्किल होता है। अतः इसमें जल की मात्रा होने की संभावना होती है। जबकि शुद्ध पेट्रोल में पानी की कोई संभावना नहीं रहती है। हालांकि ईंधन के लिए 99% शुद्व एथेनॉल (फ्यूल ग्रेड एथेनॉल) में पानी की मात्रा न के बराबर होती है।

ईंधन में पानी इंजन के लिए एक दुश्मन का कार्य करता है। इससे इंजन और फ्यूल एसेसरीज में जंग लगने की संभावना रहती है। साथ ही इससे फ्यूल एसेसरीज में लगे रबर और लोहे के पार्ट्स खराब होने की संभावना रहती हैं।

अतः पानी की मात्रा के संदर्भ में पेट्रोल इथेनॉल से बेहतर ईंधन है।

5. फ़्लैश ओर फायर पॉइंट

किसी भी ईंधन का फ़्लैश और फायर पॉइंट बहुत महत्वपूर्ण होता है।

पेट्रोल का फ्लैश प्वाइंट -43℃ तथा फायर पॉइंट -13 से -23℃ होता है।

एथेनॉल का फ्लैश प्वाइंट 13 से 14℃ तथा फायर पॉइंट 16 से 17℃ होता है।

पेट्रोल का स्वतः प्रज्वलन तापमान 247-280℃ होता हैं जबकि एथेनॉल का स्वतः प्रज्वलन तापमान 365-455℃ होता हैं।

उक्त विश्लेषण से यह समझ सकते हैं कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के दहन के लिए सामान्य पेट्रोल की तुलना में अधिक तापमान की आवश्यकता होती है। लेकिन पेट्रोल और एथेनॉल के दहन के तापमान में यह अंतर प्रभावी रूप से नगण्य है।

जलवायु और उत्सर्जन में कटौती लक्ष्यों की पूर्ति में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का योगदान

पेरिस जलवायु समझौता

पेरिस समझौता 2015 (COP 21) के अनुसार वैश्विक तापमान वृद्धि को पूर्व औद्योगिक स्तर से 2℃ से कम और संभावित 1.5℃ तक सीमित रखना है।

वैश्विक तापमान वृद्धि का एकमात्र कारण ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन है।

पेरिस समझौते के तहत ही COP 26 (ग्लास्गो, 2021) में भारत को अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDCs) से प्राप्त लक्ष्य के अनुसार वर्ष 2030 तक ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में 45% की कटौती करनी है। इसके लिए जीवाश्म ईंधन को नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्रतिस्थापित करना मुख्य उपाय है।

इस लक्ष्य के विरुद्ध भारत ने वर्ष 2005 से 2020 तक उत्सर्जन में 36% की उल्लेखनीय कटौती की है जो कि लक्ष्य के बहुत करीब है। इस लक्ष्य प्राप्ति में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की भी अहम भूमिका है।

नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन या कार्बन तटस्थता

COP 26 में ही भारत को वर्ष 2070 तक नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त है। इस लक्ष्य के तहत भारत को वर्ष 2030 तक एक अरब टन कार्बन उत्सर्जन को कम करना तथा वर्ष 2070 तक कार्बन न्यूट्रल होना है। इसमें उत्सर्जन को कम करना तथा कार्बन का अवशोषण दोनों शामिल है।

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल E20 सामान्य पेट्रोल की तुलना में लगभग 30% तक कम कार्बन उत्सर्जित करता है।

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सतत विकास लक्ष्य

सतत विकास लक्ष्य संख्या 7: सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा, को प्राप्त करने में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की अहम भूमिका है।

सतत विकास लक्ष्य संख्या 13: जलवायु कार्यवाही, के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल उत्सर्जन में व्यापक कटौती कर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा हैं।

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के अन्य फायदे

1. कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना

भारत अपनी मांग का लगभग 85 से 88% कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। 20% एथेनॉल मिश्रण से इतनी ही मात्रा में कच्चे तेल की मांग कम हो गयी। ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल बहुत बड़ा कदम है। पिछले 10 वर्षों में लगभग 18.1 मिलियन मेट्रिक टन कच्चे तेल का आयात एथेनॉल से प्रतिस्थापित हुआ है।

2. आर्थिक लाभ / विदेशी मुद्रा की बचत

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वर्ष 2014-15 से अब तक कुल 1.44 लाख करोड रुपए से अधिक विदेशी मुद्रा की बचत हुई है।

3. ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन

भारत कृषि प्रधान देश है। यहां के लगभग 55 से 60% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। इथेनॉल की मांग बढ़ने से गन्ना और मक्का जैसे खाद्यान्न फसलों की मांग बढ़ी हैं। जिसका सीधा आर्थिक लाभ किसानों को हो रहा है।

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की कमियां और समाधान

1. माइलेज में कमी

इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में कम ऊर्जा घनत्व रखता है। सैद्धांतिक रूप से 20% एथेनॉल मिश्रण से 8% तक की माइलेज में गिरावट आती है। जबकि वाहन मालिकों के दावों के अनुसार माइलेज में गिरावट काफी अधिक है। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के संबंध में यही सबसे अधिक विवाद का विषय है।

2. इंजन स्वास्थ्य प्रभावित होना

इथेनॉल में पानी की मात्रा होने से इंजन में जंग लगने का खतरा रहता है। साथ ही स्पार्क प्लग, फ्यूल एसेसरीज में लगे रबर, लोहे और प्लास्टिक के पार्ट्स खराब होने की संभावना रहती है।

समाधान

वर्ष 2023 के बाद के निर्मित फ्लेक्सी फ्यूल वाहन या BS6 वाहन पूरी तरह से 20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के अनुकूल हैं।

इंजन अपग्रेडेशन

वाहनों के इंजन के अंदरूनी पार्ट्स और फ्यूल एसेसरीज में मामूली बदलाव करके पुराने वाहनों को इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के अनुकूल बनाया जा सकता है। लेकिन इसके लिए अलग मौद्रिक कीमत चुकाना समाधान में व्यवधान उत्पन्न करता है।

3. आर्थिक लाभों का वितरण नहीं होना

इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल से वर्ष 2014-15 से लेकर अब तक लगभग 1.44 लाख करोड रुपए की बचत हुई है। लेकिन क्या इस बचत का फायदा आम जनता को मिला? इसका कोई स्पष्ट जवाब नहीं है।

इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में काफी सस्ता है। एथेनॉल मिश्रण से पेट्रोल की कीमतों में कमी आनी चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हुआ है।

4. वाहनों की वारंटी और इंश्योरेंस वैधता समाप्त होना

वाहन निर्माता कंपनियां और इंश्योरेंस कंपनियां अपनी नियम एवं शर्तों में यह वर्णन करती है कि खराब और गुणवत्ताहीन ईंधन के उपयोग से वहां की वारंटी और बीमा वैधता समाप्त हो जाएगी। शुरुआत में इन शर्तों का नुकसान ग्राहकों को भुगतना पड़ा लेकिन अब लगभग सभी वाहन निर्माता कंपनियों और इंश्योरेंस कंपनियों ने 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को वैध करार दिया है। इसके उपयोग से वहां के गारंटी और बीमा वैधता अप्रभावित रहेगी।

अन्य चिंताएं

1. जल का विदोहन

इथेनॉल निर्माण के लिए गन्ना, मक्का आदि अधिक पानी की आवश्यकता वाली फसलों की मांग बड़ी है। जिससे भूजल का तीव्र दोहन चिंता का विषय है।

2. खाद्यान्न/चारा संकट

इथेनॉल निर्माण मुख्यतः खाद्यान्न फसलों से होता है। भारत मे वर्तमान और निकट भविष्य में एथेनॉल लक्ष्यों की पूर्ति के लिए 10% अतिरिक्त हिस्से में इथेनॉल निर्माण वाली फसलों की खेती करने की आवश्यकता है। इससे खाद्यान्न और पशुओं के लिए चारे का संकट हो सकता है।

3. मृदा स्वास्थ्य

अधिक पानी की आवश्यकता वाली और खाद्यान्न फसलें मृदा पोषक तत्वों का अधिक दोहन कर मृदा को अनुपजाऊ बनती है। लंबे समय तक इसी प्रकार की फसलें उगाने से मृदा स्वास्थ्य में गिरावट होती हैं।

भारत में एथेनॉल का उत्पादन

वर्ष 2013-14 में भारत में इथेनॉल उत्पादन क्षमता 38 करोड़ लीटर थी जो वर्ष 2025 में बढ़ कर 1990 करोड़ लीटर हो गई।

20% एथेनॉल मिश्रण लक्ष्य की पूर्ति के लिए 1050 करोड़ लीटर एथेनॉल की आवश्यकता हैं।

भारत में एथेनॉल निर्माण की प्रमुख कंपनियां

भारत में एथेनॉल का उत्पादन मुख्यतः चीनी उद्योग से जुड़ी कंपनियां करती हैं। श्री रेणुका शुगर, बजाज हिंदुस्तान, बलरामपुर शुगर मिल्स, डालमिया भारत, त्रिवेणी इंजीनियरिंग, ईआरडी पैरी आदि एथेनॉल उत्पादन की अग्रणी कंपनियां है।

सारांश

पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण जलवायु लक्ष्यों की पूर्ति और कच्चे तेल के लिए विदेशों पर निर्भरता कम करने, ग्रामीण और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन करने के लिए सबसे प्रभावी विकल्प है।

प्रकृति से हम जितना प्राप्त कर रहे हैं उसके बदले वापस न के बराबर लौट रहे हैं। एथेनॉल मिश्रण से भले ही हमें ईंधन पर थोड़ा अधिक खर्च करना पड़े लेकिन पर्यावरण बचाने के लिए हमारी कुछ नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है।

किसी भी प्रोजेक्ट की शुरुआत में कुछ समस्याएं आती है लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे सब का समाधान हो जाता है।


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