बारिश के बाद क्यों लगती है अधिक गर्मी? इतना पसीना क्यों आता हैं?
बारिश के बाद क्यों लगती है अधिक गर्मी? जबकि तापमान पहले की तुलना में बहुत कम होता है। जून-जुलाई के महीने में मानसून की शुरुआत के समय या प्री मानसून की बारीश होने से भयंकर गर्मी से राहत तो मिलती हैं। लेकिन बारिश रुकने के कुछ समय बाद ही वापस गर्मी लगना शुरू हो जाती हैं। ये गर्मी पहले की गर्मी से अलग होती हैं। इसमे तापमान बारिश से पहले की अपेक्षा बहुत कम होता हैं फिर भी गर्मी बहुत लगती हैं। पसीना बहुत ज्यादा आता हैं।
वर्तमान में जब मैं पोस्ट लिख रहा हूं, 1 जुलाई 2026 को मध्य और उत्तर भारत में पहाड़ों को छोड़कर दिन का अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस है। फिर भी लोगों का गर्मी से बुरा हाल हो रहा है। पसीने से तर बतर हो रहे हैं। कपड़े पहनते ही पसीने से गीले हो जाते हैं और बाथरूम में नहाते नहाते ही पसीना आ रहा है। जबकि अप्रैल मई महीने में यहां अधिकतम तापमान 43 से 46 डिग्री सेल्सियस रहता हैं। फिर भी गर्मी से इतने परेशान नही होते हैं, इतना पसीना नही आता हैं।
इस पोस्ट में हम बारिश के बाद तापमान कम होने पर भी गर्मी अधिक लगने और पसीना ज्यादा आने की गणित को वैज्ञानिक तथ्यों के साथ विस्तार से समझेंगे।

बारिश के बाद तापमान कम होने पर भी अधिक गर्मी लगने का कारण
इसका कारण है आद्रता (Humidity). जिसे हम आम भाषा में उमस कहते हैं। आद्रता हवा में उपस्थित जलवाष्प की मात्रा या नमी का मापन हैं। अप्रैल में में मौसम शुष्क होता है यानी हवा में पानी की मात्रा बहुत कम होती है जबकि जून जुलाई में हवा में नमी बढ़ जाती है।
अप्रैल-मई में हवा में निरपेक्ष आद्रता 8-15 ग्राम/घनमीटर तथा सापेक्षित आद्रता 20-30% होती हैं। जबकि
जून-जुलाई में हवा में निरपेक्ष आद्रता 25-30 ग्राम/घनमीटर तथा सापेक्षित आद्रता 60% से अधिक होती हैं।
सापेक्ष और निरपेक्ष आर्द्रता
निरपेक्ष आर्द्रता
निरपेक्ष आर्द्रता हवा के इकाई आयतन में उपस्थित कुल पानी की मात्रा को दर्शाता है। इसकी इकाई ग्राम प्रति घन मीटर होती है।
सापेक्षित आद्रता
सापेक्षित आर्द्रता से तात्पर्य यह है की हवा में मौजूद पानी की मात्रा किसी निश्चित तापमान और दाब पर उस हवा के अधिकतम संभावित नमी धारण करने की क्षमता का कितना प्रतिशत है। इसकी कोई इकाई नहीं होती है इसे प्रतिशत में मापा जाता है।
हमारे फोन के वेदर एप्लीकेशन में आद्रता का डाटा सापेक्ष आर्द्रता होता हैं।
आद्रता बढ़ने से ज्यादा गर्मी क्यों लगती है?
इसका जवाब है जल की उच्च विशिष्ट ऊष्मा (specific heat)। जल की विशिष्ट ऊष्मा हवा की विशिष्ट ऊष्मा से कई अधिक लगभग चार गुना होती है। इस कारण समान तापमान पर भी पानी में निहित ऊष्मा या गर्मी, हवा में निहित ऊष्मा से कई ज्यादा होती हैं।
इस कारण जून जुलाई में बारिश के बाद हवा में नमी बढ़ती हैं, नमी युक्त हवा की विशिष्ट ऊष्मा बढ़ जाती है इससे उसी तापमान पर हवा की गर्मी धारण करने की क्षमता बढ़ जाती हैं। पहले जब हवा शुष्क थी या आद्रता कम थी तब किसी निश्चित तापमान पर उसमें उपस्थित ऊष्मा या गर्मी कम थी अब उसी तापमान पर क्योंकि हवा में पानी की मात्रा बढ़ गई है इसलिए इस आद्र हवा में उपस्थित ऊष्मा या गर्मी अधिक होगी। इस प्रकार सामान तापमान पर भी आद्र हवा में अधिक गर्मी होती है।
तापमान और आर्द्रता का संबंध पर विस्तृत आर्टिकल पढ़ें।
विशिष्ट ऊष्मा क्या होती है?
किसी भी पदार्थ के इकाई द्रव्यमान के तापमान को एक डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा विशिष्ट ऊष्मा कहलाती है।
जल की विशिष्ट ऊष्मा 4184 J/Kg ℃ होती हैं। अर्थात 1 Kg जल का तापमान 1 डिग्री सेल्सियस बढ़ाने के लिए 4184 जुल ऊष्मा की आवश्यकता होती है।
इसी प्रकार स्थिर दाब पर सामान्य हवा की विशिष्ट ऊष्मा 1005 J/Kg ℃ होती हैं।
अतः स्पष्ट है की इकाई द्रव्यमान में समान तापमान पर जल में उपस्थित ऊष्मा की मात्रा हवा में उपस्थित ऊष्मा की मात्रा के लगभग चार गुनी होती है।
विशिष्ट ऊष्मा का अनुप्रयोग और उदाहरण
45℃ तापमान वाली हवा से 40℃ तापमान वाला पानी अधिक गर्म लगता हैं।
तापमान क्या होता है? और यह कैसे मापा जाता है? विस्तृत आर्टिकल पढने के लिए इस लिंक पर जाएं
बारिश के बाद तापमान कम होने पर भी अधिक पसीना क्यों आता है?
हमारा शरीर इसके तापमान को संतुलित करने के लिए पसीना उत्सर्जित करता है। जब बाहर का तापमान शरीर के तापमान से अधिक होता है तब शरीर का प्राकृतिक शीतलन तंत्र सक्रिय होता है और पसीना उत्सर्जित कर शरीर का एक नियत तापमान बनाए रहने की कोशिश होती है।
जब हवा शुष्क या नमी रहित होती है तब यह पसीना लगातार सूखता रहता है। लेकिन बारिश के दिनों में जब हवा में नमी अधिक होती है तब यह पसीना सूखता नहीं है इसलिए हमें अधिक पसीना महसूस होता है।
बारिश के बाद हवा में नमी क्यों बढ़ जाती है?
बारिश होने से बारिश का रुका हुआ पानी पेड़ पौधों, मिट्टी या विभिन्न सतहों पर जमा हो जाता हैं, जो गर्मी प्राप्त होते ही वाष्पीकृत होकर हवा में मिल जाता है इस कारण बारिश के बाद हवा में नमी बढ़ जाती है।
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